2- प्रधानी के लिए चुनावी मैदान में आयी चंबल की डकैत सूरेखा

इटावा/अतुल गुप्ता : इटावा का बदनपुरा गांव में इन दिनों सूरेखा दिवाकर सुर्खियों में है। हो भी क्यों न पिछले कई सालों तक सूरेखा का नाम मध्य प्रदेष और यूपी के जिलों में डकैती के कारण चर्चा में रहता था। खाकी वर्दी वाले अधिकारी सूरेखा के नाम से कांपते थे। आज वहीं, सूरेखा दिवाकर सजा काटकर वापस आ गयी है। अपने अच्छे व्यवहार के कारण गांव के लोगों ने उसे प्रधानी में किस्मत अजमाने के लिए प्रेरित किया।


जिसका परिणाम यह है कि सूरेखा प्रधानी जीतने के लिए अपने कुछ सहयोगियों के साथ गांव के घरों में हाथ जोडकर जीताने की अपील कर रही है। हालांकि क्षेत्रीय ग्रामीण भी उसके बदले हुए नेचर से प्रभावित है और उसका सपोट भी कर रहे है। सीनियर पत्रकार अतुल गुप्ता से हुई खास बातचीत में सूरेखा दिवाकर ने अपनी पिछली जिंदगी पर प्रकाश  डालते हुए चर्चा की और वह कैसे डकैती की दुनियां में आयी उसका भी खुलासा किया।

दिवाकर ने बताया कि सलीम गुर्जर ने उसे 13 साल की उम्र में अगवा कर लिया था। तभी से उसका जीवन डकैती वाला हो गया है। अपने पूर्व के कामों के बारे में दिवाकर ने बताया कि उसने अपने दबंगई काल में किसी भी महिला को परेषान नहीं किया और न ही गिरोह के लोगों को करने दिया। लूटपाट के दौरान ही सूरज का जन्म हुआ जो आज कक्षा पांच में पढ रहा है। सूरेखा ने कहा कि पूर्व के जीवन में जो भी उसने गलतियां जाने अनजाने में की थी उसकी उसे सजा मिल चुकी है। अब वह अपना बचा हुआ जीवन समाजहित के लिए लगाना चाहती है। इसलिए वह अपने लोगों के कहने पर प्रधानी के चुनाव में भाग्य अजमा रही है। सुरेखा ने बताया कि वह सभी से सहयोग मांग रही है। किन्ही परिस्थितियों में अगर हमारा लडना रद होता है तो भाई की पत्नी भी प्रधान के लिए लडने के लिए तैयार है। हम उसका समर्थन करके उसे विजयी बनाने का प्रयास करेंगे। फिलहाल ग्रामीणों का भरपूर आषीर्वाद मिल रहा है।