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Olympic : महिला हॉकी में भारत का फाइनल खेलने का सपना टूटा

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स्पोर्ट्स डेस्क/सतीश शर्मा : अकल्पनीय को साकार करने का प्रयास सफल नहीं हो पाया। करोड़ों देशवासियों की दुआएं भी काम नहीं आई। भारतीय महिला दल भी पुरूष दल के समान आज सेमी फाइनल मैच में अर्जेन्टीना से 2-1 गोल से हारकर फाइनल प्रवेश से वंचित हो गई। वैसे दल का पदक जीतने का सपना पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कांस्य पदक के लिये अब 6 अगस्त को उसे ग्रेट ब्रिटेन से खेलना पड़ेगा।

आजके अत्यंत संघर्ष पूर्ण मैच में भारत ने खेल के शुरुआत में ही बढ़त बना ली थी। पर विश्व रैंकिंग में चौथे नंबर की अर्जेंटीना ने उस बढ़त को न केवल खत्म किया बल्कि दूसरा गोल कर फाइनल में जगह पक्की कर ली। दल की कप्तान मारिया नोएल ने दोनों गोल किये।

आस्ट्रेलिया पर जीत से आत्मविश्वास से लबरेज भारतीय महिलाओं ने खेल की शुरुआत आक्रमक ढंग से की। दूसरे ही मिनट में दांयीं ओर से बनाये हमले के फलस्वरूप दल को पहला पेनाल्टी कार्नर मिला। जिसे गुरजीत कौर ने सारे रक्षक खिलाड़ियों को चकमा देते हुए गोल में पंहुचा दिया।

अर्जेंटीना इस गोल से भौचक हो गई थी। उन्होंने अपने को संभालते हुए भारत पर आक्रमण करने का अभियान शुरू किया पर सतर्क और चौकन्नी भारतीय खिलाड़ियों ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया।बल्कि भारत ने बढ़त को मजबूत करने के लिये आक्रमण का सिलसिला जारी रखा। पहले क्वार्टर में भारतीय दल का पलड़ा भारी रहा।

पर अधिक अनुभवी अर्जेंटीना ने दूसरे क्वार्टर में भारत पर जबरदस्त दबाव बनाते हुए 18वें मिनट पर तीसरा पेनाल्टी कार्नर अर्जित किया जिसे मारिया नोएल ने गोल में बदल कर बराबरी हासिल कर ली। खेल के बराबरी पर आने के बाद अर्जेंटीना ने खेल पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। भारतीय दल की अग्रिम पंक्ति और मध्य पंक्ति थोड़ी बिखरी नजर आने लगी। तालमेल की कमी दिखने लगी। द्वितीयार्द्ध में भी अर्जेंटीना का दबाव जारी रहा।

36वें मिनट में अर्जेंटीना को पांचवा पेनाल्टी कार्नर मिला और इसे भी कप्तान मारिया नोएल ने गोल में तब्दील कर उन्होंने 2-1 की बढ़त बना ली। चौथे क्वार्टर में भारतीय महिलाओं ने वापसी की कोशिश की। मध्य मैदान में अपना अधिकार जमाने के बाद गोल मुहाने पर कई आक्रमण बनाये। पर मुस्तेद अर्जेंटीना की रक्षकों खास कर गोलकीपर किसी भी आक्रमण को सफल नहीं होने दिया और वे अंत तक अपनी 2-1 की बढ़त को बनाये रखते हुए फाइनल में प्रवेश कर गये।

अब भारत कांस्य पदक के लिये ग्रेट ब्रिटेन से मुकाबला करेगा। भारत भले ही फाइनल में पंहुचने में विफल रहा हो पर सेमी फाइनल तक का उसका सफर किसी परीकथा से कम है। विश्व रैंकिंग में 12वें स्थान के भारतीय महिला दल से यंहा तक पंहुचने की भी कल्पना तो किसी ने नहीं की थी। मात्र तीसरी बार ओलिंपिक खेलों में भाग ले रही भारतीय महिला दल ने गत रियो ओलिंपिक खेलों में 12 स्थान पाया था। वँहा दल एक भी मैच जीत नहीं सका था।

अतः टोक्यो में सभी उनसे एक आध मैच जीतने की उम्मीद कर रहे थे। दल की शुरुआत भी अच्छी नहीं हुई थी। भारतीय महिलाएं अपना पहले तीनों मैच हार गई थी। पर अपने आखिरी दो मैचों में महिलाओं ने पहले शक्तिशाली आयरलैंड को 1 गोल से और फिर द.अफ्रीका को रोमांचक मुकाबले में 4-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई तो सभी हाकी प्रेमी प्रसन्न हो उठे थे।

क्वार्टर फाइनल में तीसरी रैंकिंग प्राप्त आस्ट्रेलिया के विरुद्ध तो बड़े से बड़े समर्थक ने भी जीत की उम्मीद नहीं रखी थी। लेकिन दल ने मजबूत इरादों से खेलते हुए महिला हाकी इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए एक नया इतिहास रच डाला अगर 6 अगस्त को दल ने ब्रिटेन को हराकर कांस्य पदक जीत लिया तो यह विश्व महिला इतिहास में एक नये अध्याय की रचना तो करेगा ही साथ ही यह देश में हजारों लाखों लड़कियों को हाकी स्टिक पकड़ने के लिए भी प्रेरित करेगा।

( लेखक वरिष्ट खेल पत्रकार है )

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