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बाराबंकी: अपनी बदहाली को तरसती गौशाला, प्रयाप्त व्यवस्था न होने के कारण जोरदार बरसात में भीगने को मजबूर गौवंश

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सिरौलिगौसपुर बाराबंकी/जय शंकर पाण्डेय : गौवंश संरक्षण की हकीकत प्रशासन के दावों और कागजी आंकड़ों से बिल्कुल अलग है । गौशाला में संरक्षित गौवंश अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। विकासखंड सिरौलीगौसपुर में गौवंश संरक्षण के लिए पांच गौशालाऐं बनी है। जिनमें क्षमता से अधिक जानवर होने के कारण मौजूद व्यवस्थाएं कम पड़ रही हैं। श्यामनगर बिरौली व ठाकुरपुर की गौशालाओं मे संरक्षित अधिकांश गौवंश को टीन शेड तक भी नहीं नसीब हो रहा है। गर्मी हो या बरसात गौवंश खुले में ही खड़े रहते हैं।

गौशाला परिसर में पूर्ण रूप से खड़ंजा निर्माण ना होने के कारण गंदगी व कीचड़ भी भरा हुआ है। कीचड़ में फसें जानवर बीमार हो रहे हैं। गौशालाओं की साफ-सफाई भी उचित ढंग से नहीं हो पा रही है। रविवार को बरसात के समय यह संवाददाता गौशालाओं की हकीकत जानने सबसे पहले श्यामनगर पहुंचा तो वहां अधिकांश जानवर खुले आसमान के नीचे खड़े भीग रहे थे । दो बीमार जानवर खुले में पड़े हुए थे। इस गौशाला में दो टीन शेड बने हुए हैं। यहां पर करीब डेढ़ सौ जानवर सांरक्षित किए गए है। जिन्हें बरसात मे भीगने से बचाने के लिए टीन शेड कम पड़ रहे हैं।

यहां के प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि एक टीन शेड और लगाने के लिए अधिकारियों से मांग की गई है। इसी प्रकार ठाकुर पुर व बिरौली की गौशालाओं में भी अव्यवस्थाओं के चलते जानवर बरसात में भीग रहे हैं । विकासखंड सिरौलीगौसपुर की सबसे बड़ी गौशाला बिरौली की है । जहां करीब 600 जानवर संरक्षित किए गए हैं । यहां भी दो-टीन शेड ही बने हुए हैं। यहां के अधिकांश जानवर खुले में रहते हैं। इस गौशाला में कमजोर एवं बीमार जानवरों की स्थिति काफी खराब है । यहां दर्जनों जानवर बीमार पड़े हैं। ठाकुरपुर की गौशाला में ढाई सौ से अधिक गोवंशों का संरक्षण किया गया है । यहां भी दो टीन शेड ही जानवरों के सर छुपाने के लिए बनाए गए है।

यहां के अधिकांश जानवर खुले में रहने को मजबूर हैं। इस गौशाला का दो-तीन दिन पूर्व नोडल अधिकारी द्वारा निरीक्षण भी किया गया है किंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है। गौशालाओं में संरक्षित जानवरो का नियमित उपचार नहीं होता है मजदूरों ने बताया कि डॉक्ट तीसरे चौथे दिन आते हैं। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सभी गौशालाओं से प्रस्ताव मंगाए गए हैं । जहां व्यवस्था कम पड़ रही है वहां जल्द ही व्यवस्था बनाई जाएगी ।

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