सूरत में कोरोना से बेहद नाजुक स्थिति, श्मशान में अंत्येष्टि के लिए लगाना पड़ रहा नंबर, परिजनों को करना पड़ रहा घंटो इंतजार

सूरत ( bpn ) : गुजरात के सूरत में कोरोना संक्रमण की स्थिति बेहद गम्भीर है । हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंत्येष्टि के लिए नम्बर लगाना पड़ रहा है । सूरत में कोरोना से गुरुवार को हुई मौतों के बाद देखते -देखते श्मशान घाट पर 40 शव पहुंच गए ।परिजनों को अंत्येष्टि के लिए नम्बर लगाने पड़े तथा घंटों इंतजार करना पड़ा। प्रशासन ने श्मशान में शवों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, अब पड़ोसी शहर बारडोली में अंतिम संस्कार के लिए शव भेज रहा है।


एक हिंदी दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक गुजरात में मृतकों के अंतिम संस्कार में भी वेटिंग वाली स्थिति है। सूरत के एक श्मशान में गुरुवार को कोरोना से हुई मौतों के बाद चंद घंटों में 40 शव पहुंचे। यहां 15 मिनट में ही 3 एंबुलेंस से 9 शव लाए गए। यही नहीं एक एंबुलेंस में तो 6 शव रखे हुए थे। एक दिन में पहली बार इतने शवों के चलते यहां जगह कम पड़ गई। नतीजा यह हुआ कि परिजन को अंतिम संस्कार के लिए 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। प्रशासन के अनुसार सूरत में कोरोना से रोज 5 से 8 मौंतें दर्ज हो रही हैं। हकीकत यह है कि कोविड प्रोटोकॉल से रोज 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

श्मशान गृहों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला रहा। यही हाल अश्निनी कुमार श्मशान गृह का भी जहां, तीन-चार एंबुलेंस रोजाना 3-4 फेरे लगा रही हैं। बुधवार को एक ही एंबुलेंस से 6 शव भेजे गए थे। जिन मृतकों के शव वहां रखे हुए थे उनमें से कई के परिजनों को तो पता ही नहीं चल रहा था कि उनके रिश्तेदार का शव कौन सा है।
जिन मृतकों के शव वहां रखे हुए थे उनमें से कई के परिजनों को तो पता ही नहीं चल रहा था कि उनके रिश्तेदार का शव कौन सा है, शहर के श्मशान में शवों की ऐसी भीड़ कि अब बारडोली भेजने लगे शहर के श्मशान गृह में वेटिंग बढ़ने के कारण बुधवार को प्रशासन ने कोरोना से मरने वालों का बारडोली के श्मशान में अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। शाम को 5 शव दाह संस्कार के लिए भेजे गए।

बारडोली के प्रांत अधिकारी वीएन रबारी और जिला पंचायत अध्यक्ष भावेश पटेल ने श्मशान का दौरा कर ट्रस्ट के अध्यक्ष सोमाभाई पटेल से चर्चा की। श्मशान के संचालक भरतभाई शाह ने बताया कि ट्रस्ट ने शहर के 5 शवों के दाह संस्कार करने का निर्णय लिया है। कतार में शव ऐसे रखे जा रहे हैं कि परिजनों के लिये अपने का शव खोजना कठिन हो गया है ।कई बार तो ऐसा देखने को मिला कि मृतकों के परिजनों का पता नहीं चल पा रहा था कि उनके रिश्तेदार का शव कौन सा है और एंबुलेंस के कर्मचारियों ने कहां रख दिया है