बिहार में गजब की शराबबंदी: दिखती कहीं नहीं, मिलती सब जगह

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सुपौल/प्रतिनिधि: अप्रेल 2016 से बिहार में शराब बंदी लागू है .शराब बंदी के बाद बिहार में शराब दिखती तो कही नही है पर मिलती हर जगह है .ऐसा नही है सरकार के इस सार्थक प्रयास का नतीजा समाज पर नही पङा है. लेकिन जिनके जिम्मे इस शराबबंदी को सफल बनानें का जिम्मा उन लोगो की लापरवाही का नतीजा है कि गांव गांव में शराब उपलब्ध है .भले ही इन सुदूर गांवो में आपको जीवन रक्षक दवायें नही मिले लेकिन सभी ब्रांड शराब यहां उपलब्ध है .हमने जो खुलासा किया है वो चौकानें वाला है .कही झोले में लेकर शराब पहुँचायी जा रही है तो कही काउंटर लगाकर शराब बेची जा रही है.वो भी थानें से महज 500 मीटर की दुरी पर

5 अप्रेल 2016 को शराबबंदी के बाद कोई राज्य सरकार के इस सार्थक प्रयास की सराहना कर रहा था तो कोई इसे बेतूका बता रहा था .लेकिन आज 3 साल बाद भी शराब मिलने और पीने पिलानें का दौर बदस्तूर जारी है .प्रशासनिक आकङा कहता है कि हर रोज 9 लोग शराब तस्करी या पीने के कारण जेल जा रहे है जो कही न कही इस शराब बंदी के बाद तस्करों शराब की उपलब्धता की पुष्टि करता है .हमने इसके लिए सुपौल के राधोपुर थाना से महज कुछ ही दुरी पर रात अपनी जांच शुरु की तो सत्तू भुजे की बोर्ड लगी दुकान पर सत्तू और भुजा तो नही मिल रहा था लेकिन काउंटर लगाकर शराब बेची जा रही थी ,शराब की हर ब्रांड वहां उपलब्ध थी .फिर हमने सोचा हो सकता है सुबह इस जगह शराब नही मिले लेकिन सुबह पहुँच कर उसी दुकान पर शराब की मांग की ट्रीपल एक्स रम से लेकर विस्की,बीयर सब कुछ था .

बकायदा एक शख्स बैठे बैठे चुस्की का मजा भी ले रहा था .जिस स्थल पर हमने ये स्टिंग किया वो राधोपुर थाना से 500 मीटर और एनएच 57 से 200 मीटर की दुरी थी .फिर हम गांव की और निकले तो रास्ते में राधोपुर के ही परसरमा गांव में हमने शराब की खोज की तो15 मीनट बाद झोले में शराब और मिनिरल वाटर लिये एक तस्कर पहुँचा .इसी दौरान हमारी नजर उसके झोले पर पङी तो हमने उस ब्रांड की मांग की जो उसके पास नही था तो उसने तुरंत किसी ओर तस्कर का नाम बताया यानि एक ही गांव में कई तस्कर है जो शराब लोगो तक पहुंचा रहे है .फिर हम कुछ आगे निकले तो एक गांव में हमने शराब की खोज की तो वहां फुल बोतल से निकाल कर हमे 180 एमएल शराब दी जाने लगी .

शराब बंदी के बाद पुलिस का आकङा कहता है कि रोज 9 लोग शराब के तस्करी ये पीने में जेल जा रहे है .अकेले उत्पाद विभाग का आकङा बताता है कि साल 2016 से 21 फरवरी 2019 तक उत्पाद विभाग ने 7567 स्थानों पर छापेमारी की .जिसमें 800 मामलें दर्ज हुए.वही 878 लोगो को जेल भेजा गया .जिसमें 844 लोगो जमानत पर है .अकेले उप्ताद विभाग ने 1 अप्रेल 2016 से 21 फरवरी 2019 तक 29 हजार 423 लीटर देशी शराब बरामद की .तो चुलाई शराब कुल 571 लीटर,वही विदेशी शराब 1630 लीटर जब्त की .

हाल ही में तस्करी गिरोह के एक नये नेटवर्क का पर्दाफाश किया था जिसमें शबाब के सहारे शराब की तस्करी हो रही थी .हलाकि सरकार की शराब बंदी को विपक्ष के पुरी तरह फेल बताते है .अनुमानित रुप में देखें तो सुपौल के विभिन्न थाना ईलाके में रोजाना एक करोङ से अधिक का शराब का काला कारोबार है .वही स्थानीय लोग बताते है कि ये सब पुलिस की मिली भगत से होता है .शराब बिक्री की सूचना करनें पर पुलिस ही तस्करों को जानकारी दे देती है .

प्रकाश यादव राजद प्रखंड अध्यक्ष राधोपुर सुपौल, अमरजीत कुमार स्थानीय इस दर पर आसानी से उपलब्ध हो रही है शराब 1.हरियाणा ,झारखंड से राँयल स्टेग की एक पेटी 7 हजार में ,बिक्री 1500 रुपैये बोतल 2.बंगाल से इंमपेरियम ब्लू और राँयल चैलेन्ज 9 हजार रुपैये पेटी,1500 से 1800 में बिकती एक बोतल 3.नेपाल से सोफिया देशी दिलवाले शराब 1200 रुपैये में 30 पीस की पेटी ,80 से 100 रुपैया बिकता एक बोतल

300 रुपैये में मिलता है बियर चार स्टेज में फोन पर होता है कार्य पहला स्टेज–दुसरे राज्य में बैठे पहला पार्टी का काम का एनएच तक शराब का ट्रक पहुँचाना,फिर इस ईलाके बङे हालसेलर वहां से लाते है ट्रक,फिर यहां छोटे व्यपारी के हाथो बिकती है शराब ,छोटे व्यपारी गांव गांव तक झोले में बेचने वाले को पहुँचाते है शराब। शराबबंदी की सोच मुख्यमंत्री की सबसे अच्छी सोच है ये हम नही कहते राज्य की लाखो जनता इसे सही बता रही है .लेकिन बङा सवाल है कि शराबबंदी के बाबजूद,इतने कङे कानून के बाबजूद तस्कर क्या बिना मिली भगत के इतने बङे पैमाने पर शराब की कारोबार करते है .