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महाराजा बख्तावर सिंह को सरकार ने नहीं वंशजों ने किया याद

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बेगूसराय/विनोद कर्ण: चकवार वंश के महाराजा बख्तावर सिंह की प्रतिमा का अनावरण शाम्हो के चंडी स्थान में रविवार को किया गया. इस मौके पर मध्य विद्यालय में आयोजित समारोह में चकवार चंद्रिका का विमोचन भी किया गया. समारोह की अध्यक्षता करते हुए मां चंडी चकवार कल्याण समिति के अध्यक्ष शालिग्राम सिंह ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि चकवार वंश में राजा तो कई हुए लेकिन महाराजा एक ही बख्तावर सिंह हुए.

बख्तावर सिंह न सिर्फ योध्दा थे, बल्कि दूरदर्शी भी थे. इसी कारण उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के साजिश को पहले ही समझते हुए बगावत शुरू कर दिया. अगर उस समय के राजा- राजवाड़े का फौज उन्हें मदद करती तो भारत में ब्रिटिश का साम्राज्य कायम नहीं होता. महाराजा बख्तावर सिंह ने इस्ट इंडिया कंपनी के जल मार्ग के उपयोग पर टैक्स लगा दिया. अंग्रेजों व्दारा टैक्स नहीं देने पर उनके मालवाहक पानी जहाज को गंगा नदी में रोककर जबरन टैक्स वसूलना शुरू कर दिया.

इससे बौखलाए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें जलदस्यु घोषित कर उनके सिपाहियों के साथ लड़ाई शुरू कर दिया. उनके कई सैनिकों को भी मार गिराया. लेकिन वे जीवन पर्यंत अंग्रेजों से लड़ते रहे. उनके वंशज भी राजा हुए और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई. लेकिन अफसोस है कि आजादी के बाद सरकार ने कभी बख्तावर सिंह को सम्मानित करने का काम नहीं किया. यही कारण है महाराजा बख्तावर सिंह के वंशजों ने उनकी प्रतिमा को स्थापित कर उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया. उस समय चकवार साम्राज्य की राजधानी शाम्हो थी, इस कारण हमने शाम्हो के लोगों से प्रतिमा लगवाने में सहयोग का अनुरोध किया. शाम्हो के लोग धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने उनके अनुरोध को स्वीकार किया और आज हम प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं.

अंग्रेजों ने तोड़-मरोड़कर इतिहास को पेश किया

महाराजा बख्तावर सिंह की प्रतिमा का अनावरण करते हुए पूर्व विधायक कृष्णचंद्र सिंह ने कहा कि इतिहास को अंग्रेजों ने अपने हिसाब से तोड़ – मरोड़कर पेश किया जिसमें बख्तावर सिंह ऐसे देशभक्त महापुरुषों को डकैतों की श्रेणी में डाल दिया. जिस कारण किसी सरकार ने उनकी सुधि नहीं ली. उन्होंने कहा कि बख्तावर सिंह महान देशभक्त थे. वे योद्धा थे. ब्रिटिश सरकार के ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ सबसे पहले बगावत शुरू किया था. उन्होंने इतिहास की जानकारी देते हुए कहा कि महाराजा की पदवी उन्होंने स्वयं लगाई थी और सिंहदेव भी.

अपना पूरा नाम वे महाराजा बख्तावर सिंहदेव लिखते थे. उन्होंने बताया कि मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल में उन्हें सूबेदार नियुक्त किया गया था. इसके बाद उन्होंने अपना साम्राज्य कायम किया. अंग्रेज के शासनकाल आते-आते वे अपने सैन्य संगठन को भी बढ़ाने में लग गए और इसी क्रम में उन्होंने बेलौचें मूल के लोगों को बसाया. जिसकी आबादी आज भी गंगा किनारे के क्षेत्र में सर्वाधिक है.

महाराजा बख्तावर सिंह वंश के अंतिम राजा रूपो सिंह यानी रुकमणी राना सिंह हुए. महाराजा के बाद जितने भी चकवार शासक हुए किसी ने अपने को महाराजा नहीं कहा, वे राजा ही लिखते थे. इसलिए महाराजा बख्तावर सिंह की प्रतिमा सबसे पहले लगाना न्यायोचित है. उन्होंने चकवार समाज के लोगों से कहा कि वे समाज के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए संगठित हो और अपने समाज के जो वंचित हैं उन्हें प्रोत्साहित करें. 

मुख्य अतिथि व बिहार इंडस्ट्री एसोसिएशन के संयोजक कृष्ण प्रसाद सिंह केसरी ने कहा कि चकवार वंश के जो भी लोग देश-विदेश में रह रहे हैं उनकी एक सूची बनाई जाय. उनका पता व मोबाइल नंबर जिनके पास में हो वह समिति को उपलब्ध कराएं. ऐसे लोगों से संपर्क कर हम समिति के कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं. उन्होंने इस संगठन को हर संभव सहयोग करने का वादा किया.

सर्वेश कुमार ने किया चकवार चन्द्रिका लोकार्पण

मौके पर चकवार चंद्रिका पुस्तक का लोकार्पण करते हुए गंगा ग्लोबल B.Ed कॉलेज के निदेशक सर्वेश कुमार ने कहा कि हमारे पूर्वजों का इतिहास अनुकरणीय रहा है. इस पुस्तक में काफी जानकारी दी गई है. फिर भी कुछ छूट गए होंगे. उन्होंने कहा कि महाराजा न्याय के पक्षधर थे. देशभक्ति उनमें कूट-कूट कर भरी थी. उन्होंने चकवारों की एकता के लिए कई सुझाव देते हुए कहा कि दायित्व का बंटवारा संगठन की ओर से किया जाना चाहिए. संगठन चलाने के लिए पैसे की कोई समस्या नहीं आएगी. पहले ट्रस्ट का गठन करें और उसे निबंधित कराकर क्रमशः आगे बढ़े.

शिक्षा और चिकित्सा पर केंद्रित होकर करें काम

दंत चिकित्सक राम प्रवेश सिंह ने कहा कि समिति शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र को लक्ष्य कर काम करे. उनका पूरा सहयोग मिलेगा. वे कई वर्षों तक दियारा में निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगा चुके हैं. गरीब मेधावी छात्रों को मदद देने पर बल दिया. इस मौके पर वक्ताओं ने संकल्प लिया की चकवार वंश के आर्थिक रूप से पिछड़े मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मदद करेंगे. साथ ही गंभीर बीमारी होने पर चिकित्सा के लिए भी सहयोग करेंगे शिक्षा. दोनों कार्य में सहयोग के लिए 25 लाख रुपये जमा करने का संकल्प लिया गया. सहयोग राशि दो स्तर पर संग्रहित करने का सुझाव आया. गेहूं के फसल के समय किसानों से अनाज व व्यवसायी वर्ग से नगद सहयोग लेने का सुझाव आया.

मंच का संचालन बस मालिक एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने किया जबकि राजदेव प्रसाद सिंह, सहदेव सिंह, रामसागर सिंह, कौशलेंद्र सिंह, मोहन सिंह, पशुपति सिंह, प्रो. गंगा प्रसाद सिंह आदि ने भी संबोधित किया. धन्यवाद ज्ञापन महंत सियाराम दास ने किया.

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