बहुत महंगे हैं बिहार में शराब पकड़ने वाले ये कुत्ते, जानिए इनके एक महीने का खर्च

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सेंट्रल डेस्क : बिहार में शराबबंदी है, बावजूद इसके शराब तस्करों के हौसले बुलंद हैं और वह धड़ल्ले से शराब कारोबार में लगे हैं. लेकिन अब शराब तस्करों पर लगाम लगाने के लिए बिहार प्रशासन ने नई तैयारी कर ली है. शराब माफिया और उनके मददगारों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य के सभी 11 डीआइजी रेंज में तेलंगाना से ट्रेनिंग लेकर लौटे 20 डॉग की तैनाती कर दी गयी है.
बिहार पुलिस के ये ‘स्पेशल सिपाही’ अब पलक झपकते ही शराब पकड़ लेंगे. दो मिनट में पूरे ट्रक की तलाशी कर लेंगे. इन सिपाहियों को रिश्वत या प्रभावशाली व्यक्ति के नाम पर धौंस भी नहीं दिया जा सकेगा. शराब तस्करों के खिलाफ मोर्चा संभालने के लिए 20 स्निफर डॉग को नौ महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी गयी है.

इन डॉग स्क्वायड ने गुरुवार को शास्त्र नगर कैनाल परिसर में पुलिस के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बिहार पुलिस ज्वाइन कर ली. एडीजी सीआइडी विनय कुमार ने बताया कि शराब पकड़ने के लिए डॉग स्क्वायड तैनात करने वाला बिहार पहला राज्य है. पटना में चार डॉग स्क्वायड तैनात किये गये हैं. सीमावर्ती व शराब तस्करों की सक्रियता वाले रेंज में दो-दो दस्ते तैनात किये गये हैं. इनके रहने के लिए रेंज मुख्यालय में इंतजाम है.

एक डॉग पर हर माह इतना होगा खर्च

स्निफर डॉग को हैदराबाद स्थित इंटिग्रेटेड इंटेलिजेंस ट्रेनिंग सेंटर (आइआइटीए) में विशेष दूरी से शराब और अन्य मादक पदार्थ सूंघकर पता लगाने की ट्रेनिंग दी गयी है. एक डॉग पर सिपाही रैंक के दो हैंडलर तैनात हैं. इनके वेतन पर करीब 90 हजार रुपये खर्च होते हैं. डॉग स्क्वायड के एक जवान के एक महीने के खाने का बजट 15 हजार रुपये है. वैक्सीन, दवा आदि पर भी प्रतिमाह 10 हजार रुपये खर्च आयेंगे.