डुमरांव : सुमित्रा महिला कालेज बेटियों के लिए है वरदान, प्रत्येक साल दो हजार बेटियां बनती ग्रेजुएट

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बक्सर/अरुण विक्रांत: बक्सर जिला के डुमरांव अनुमंडल का इकलौता सशक्तीकरण एवं नारी स्वावलंबन का प्रतीक बन चुका है। नैतिक मूल्यो के बढ़ावा के साथ शिक्षा की गुणवता को आत्मसात करते हुए वर्ष 1984 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर महज सात छात्राओं के बूते सुमित्रा महिला महाविद्यालय की स्थापना पेशे से चर्चित डाक्टर स्व. जगनारायण सिंह के द्वारा स्थापना की गई।

लंबे काल तक विषम परिस्थितियों से गुजरते हुए यह कालेज संस्थापक के सपना को साकार करने में कामयाब हो चुका है। वर्तमान में इस विद्यालय के विभिन्न कक्षा के विभिन्न संकाय को मिलाकर 3 हजार डुमरांव की बेटियां शिक्षा ग्रहण करती है। जब कि प्रत्येक साल 2 हजार डुमरांव की अमीर से लेकर गरीब परिवार की बेटियां छात्रा के रूप में सुमित्रा महिला कालेज से स्नातक की परीक्षा पास कर डिग्री धारक बनती है। जिससे डुमरांव क्षेत्र गौरवान्वित महसूस करता है।

जानकार सूत्रों की मानें तो डुमरांव स्थित इस कालेज में स्नातक तक दिए जाने वाले अब वाणिज्य बिषय की पढ़ाई शुरू करने की विश्व विद्यालय प्रशासन ने अनुमति दे दी है।

कभी साधारण भवन में चलने वाले इस महाविद्यालय प्रांगण में अब कक्षा संचालित किए जाने को लेकर भव्य भवन के आलावे बड़ा कामन रूम, प्रायोगिक कक्षाएं, पुस्तकालय भी उपलब्ध है। वहीं कालेज में मौजूद एनसीसी एवं एनएसएस छात्राओं के बीच राष्ट्रीय भावना सहित समाजसेवा की भावना को पैदा करता है। एनसीसी के बदौलत इस कालेज की आधा दर्जन छात्राएं स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर मार्च पास्ट कर पुरस्कार पा चुकी है।

नतीजतन डुमरांव की हर बेटी सुमित्रा महिला कालेज में दाखिला पाने को लेकर उत्सुक रहती है। सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करते हुए भले ही बेटियों के बीच शिक्षा के प्रसार किया गया है। पर डुमरांव शहर के बीचो बीच अवस्थित सुमित्रा महिला कालेज की एक अलग पहचान बन चुकी है।

क्या कहते है नागरिक-

पेशे से समाजसेवी 76 बर्षीय वरिष्ठ नागरिक सत्यनारायण प्रसाद कहते है कि वाकई सुमित्रा महिला कालेज के खुलने के बाद से नगर की बेटियों के बीच उच्च शिक्षा पाने को लेकर हौसला आई है। अमीर से लेकर गरीब अभिभावको के बीच बेटी को उच्च शिक्षा देने को लेकर साहस आई है।

पेशे से व्यवसायी महेन्द्र केशरी ने कहा कि कभी एक समय था कि गरीब बाप की बेटी उच्च शिक्षा पाने से वंचित रह जाती थी। अमीर बाप की बेटी तक उच्च शिक्षा सिमट कर रह जाता था।

पेशे से राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नथुनी प्रसाद खरवार का कहना है कि सरकार द्वारा लड़कियों के बीच शिक्षा के प्रसार के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभ प्रदान किया जाता है। पर सुमित्रा महिला कालेज लड़कियों के लिए वरदान साबित हो चुका है।

प्राचार्य का दावा-सुमित्रा महिला कालेज में पढ़ने वाली बच्चियों के बीच नैतिकता,राष्ट्रीयता का बोध कराते हुए गुणवतापूर्ण शिक्षा का ख्याल रखना पहली प्राथमिकता रहती है। निकट भविष्य में कालेज को पूरे शाहाबाद क्षेत्र के मानचित्र पर पहले स्थान पर पंहुचाने का लक्ष्य है।