बक्सर: स्थानीय निकाय लेखा परीक्षा दल के शिकायत को दिखाया जाता है ठेंगा

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बक्सर( अरुण विक्रांत): आप माने अथवा नही माने। पर डुमरांव नगर परिषद हम नहीं सुधरेगें की तर्ज पर चलता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर सामान्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा नप के कार्य शैली पर बराबर सवाले खड़े किए जाते है। विकास कार्यो में कथित लूट खसोट को लेकर जांच पड़ताल कर कारवाई किए जाने की मांग की जाती है। पर नतीजा शून्य निकलता है। दबे जुबां लोगो कहते है कि स्वंयसेवी संस्था मामले में प्रशासन व शासन की अनदेखी के चलते नप हम नहीं सुधरेगें की तर्ज पर चलता है।

आश्चर्य की बात तो यह है कि सरकार की वित लेखा जांच एजेंसी द्वारा नप के कार्यशैली को लेकर अपनी कलम से रेड क्रास लगाए जाने के बाद भी उनके कार्यशैली में अब तक कोई बदलाव नहीं आ सका है। जो एक यक्ष सवाल को जन्म देते दिखता है। यू तो डुमरांव नगर परिषद के लिए यह पुराना मैटर है। पर मामला काफी गंभीर व चैकाने वाला है। लेखा परीक्षा दल की नप की जांच रिर्पोट से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

सरकारी पैसे का खर्च करने के कार्यशैली पर आपति व सवाल खड़ा किये जाने का मामला चैकानें वाला है। लेखा परीक्षा दल के प्रतिवेदन नें नागरिकों को चकित कर दिया है। शहरी निकाय सामाजिक प्रक्षे़त्र-1, पटना की लेखा परीक्षा दल द्वारा वितीय बर्ष 2012-13 एवं 13-14 तक संबंधित लेखा अभिलेखों की जांच रिर्पोट है। जांच रिर्पोट में लेखा परीक्षा दल नें कई विकास योजनाओं के मद में खर्च किये गये सरकारी राशि के तरीक्के पर आपति दर्ज करायी है। इसका जागता नमूना बर्ष 2012 में चापाकल योजना में खर्च किया गया सरकारी राशि है।

लेखा परीक्षा दल द्वारा न प के कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपे गये प्रतिवेदन की मानें तो नगर परिषद को नगर विकास विभाग के पत्र संख्या 180/30 मार्च,2011 के माध्यम से 10 लाख 40 हजार की राशि प्राप्त हुयी । चापाकल लगाने के लिए मार्च, 2012 में निविदा प्रकाशित करने के बाद अप्रैल,12 में कार्यान्वयन की स्वीकृति प्रदान की गयी। कुल 9 चापाकल के लिए प्रति चापाकल की प्राक्कलन राशि 50 हजार 362 रूपया तय की गयी ।

नगर में कुल 9 चापाकल लगाये गये । वहीं लेखा परीक्षा पदाधिकारी शंभू प्रसाद गुप्ता द्वारा चापाकल योजना के मामले में नप द्वारा उपलबध कराये गये सूचना के आधार तैयार निरीक्षण प्रतिवेदन में कई गंभीर मामले उजागर करते हुए आपति दर्ज डाली है। लेखा परीक्षा पदाधिकारी की आपतियुक्त प्रतिवेदन के अनुसार, मापी पुस्तिका के अनुसार 9 चापाकल लगाये गये। इस प्रकार प्रति चापाकल के हिसाब से 4 लाख 53 हजार 258 रूपये का भुगतान किया जाना चाहिए था । जब कि संचिका के अनुसार 8 लाख 46 हजार 698 रूपये का भुगतान किया गया।

आगे लेखा परीक्षा पदाधिकारी नें दर्ज आपति में सवाल खड़ा किया है कि विभिन्न वार्ड पार्षदों द्वारा कुल 11 चापाकल लगानें का प्रस्ताव दिया गया था तो किस आधार पर 16 चापाकल लगानें की राशि निर्गत करने का आदेश दिया गया? मापी पुस्तिका के अनुसार कुल 9 चापाकल लगाये गये, जब कि सिर्फ 1 चापाकल का प्रमाण पत्र संलग्न पाया गया ।इस अंतर के कारण से लेखा परीक्षा दल को अंकेक्षण की समाप्ति तक अवगत नहीं कराया गया।


दल यह जानना चाहता था कि निविदा में कितने निविदाकर्ता नें भाग लिया। पर लेखा दल को संचिका के अवलोकन से यह नहीं पता चल सका कि निविदा में कितने निविदादाता नें भाग लिया था। सूचना संचिका में अनुपलब्ध थी। उन्हे कार्यालय द्वारा यह बताया गया कि मापी पुस्तिका एवं आदेशफलक को मिलाकर संबधित संचिका के निष्पादन की कार्यवाही की जायेगी। जबाब मान्य नही है, क्यों कि संचिका का निष्पादन किया जा चुका था।

इस आशय का जिक्र लेखा परीक्षा दल ने आपने जांच रिर्पोट में किया है। दुसरी ओर लेखा परीक्षा दल नें चैंकाने वाले तथ्य को उजागर करते हुए आपति किया है कि चापाकल लगानें संबधी बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव की छायाप्रति मांगे जाने के बावजूद दल को उपलब्ध नहीं करवायी गयी।
क्या कहते है स्थानीय नागरिक- नगर परिषद के पूर्व वार्ड पार्षद धीरज कुमार, पूर्व उपाध्यक्ष ललन सिंह यादव, वरिष्ठ नागरिक व सीपीआई नेंता सत्यनारायण प्रसाद, सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धानंद तिवारी जद यू नेंता नथुनी प्रसाद खरवार, प्रबुद्ध नागरिक सिद्धनाथ सिंह यादव, जद यू नेंता गोपाल प्रसाद गुप्ता नें नप के गलत कार्यशैली पर अंकुश लगाने को लेकर जांच-पड़ताल कराने की मांग की है।