डुमरांव के संस्कृति से जुड़ी कांव नदी के अस्तित्व एवं अस्मिता पर मंडराने लगे हैं संकट के बादल

बक्सर(अरूण विक्रांत): इतिहास गवाह है,पंजाब के सतलज नदी के तर्ज पर स्वतंत्रता आंदोलन के आंदोलनकारी डुमरांव के वीर सपूतों ने कांव नदी के तट पर 16 अगस्त,सन् 1942 को सभा आहूत कर वतन को गुलामी से मुक्ति को लेकर कसमें खाई थी। लेकिन दुखःद बिडम्बना है कि डुमरांव की संस्कृति एवं इतिहास से जुड़ी कांव नदी की अस्मिता एवं अस्तित्व पर खतरा के बादल मंडराने लगे है। नित्य कांव नदी की जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध रूप कब्जा करने की होड़ सी मची हुई है।



दबंगों द्वारा कांव नदी की जमीन पर कब्जा करने की हद कर दी है। इसका आलम यह है कि कांव नदी के गर्भ तक में लंबे-लबें पत्थर के खंभे गाड़ जमीन पर अपनी दावेदारी ठोके जा रहे है। कांव नदी की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले तत्वों द्वारा येन-केन प्रकारेण खरीद एवं बिक्री का धंधा जारी है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अंचल कार्यालय के अपरोक्ष एवं परोक्ष रूप से प्राप्त सहयोग के बूते भू-माफियाओ का हौसला इस कदर बढ़ा हुआ है कि भारत सरकार के नाम कांव नदी के तट की जमीन का व्यक्ति बिशेष के नाम पर जमाबंदी करा लिया है। इस मामले को लेकर नागरिको द्वारा जिलाधिकारी सहित भूमि उप समाहर्ता के पास शिकायत किया गया है।

अतित के आईने में कांव नदी- कभी उद्गम स्थल सोन नदी से निकलकर मलियाबाग, केसठ भाया कोरानसराय के रास्ते डुमरांव की घनी आबादी को स्र्पश करते हुए नया भोजपुर के ताल यानि गंगा नदी में विलीन हुआ करती थी। इस नदी के बहते पानी का सीधा लाभ क्षेत्र के किसान उठाते थे। कांव नदी के निकट मौजूद पोखरा का पानी हर बरसात के मौसम में बदल कर कांव नदी का पानी संचय किया जाता था।

कभी साल भर पानी से भरे रहने वाले नदी में क्षेत्र के लोग स्नान करने के आलावे तैराकी का प्रशिक्षण पाते थे।पर कालांतर में सोन नदी में पानी की कमी का असर कांव नदी पर भी पड़ा और कांव नदी में पानी का बहना बंद हो गया। बावजूद बारिस के मौसम में कांव नदी में पानी का बहाव जारी रहता है पर इस नदी के उद्गम स्थल से लेकर अतिंम क्षोर तक दबंगों की पड़ी टेढी नजर लग गई है। कांव नदी की जमीन का लगातार कब्जा जारी है।

जल संरक्षण योजना असफल- यूं तो सरकार नें पानी संचय को लेकर कई तरह की योजनाएं बना रखी है। लेकिन इस कांव नदी को संरक्षा एवं सुरक्षा प्रदान करने में विफल साबित हो चुकी है।
क्या कहते है नागरिक-वरिष्ठ नागरिक सत्यनारायण प्रसाद, जद यू नेंता भरत मिश्रा, भाजपा नेंता ओमप्रकाश सिंह भुवन, चुनमुन प्रसाद वर्मा, अधिवक्ता राजीव कुमार भगत, इंका नेंता श्रद्धानंद तिवारी, दशरथ प्रसाद विद्यार्थी,राजद नेंता रामजी सिंह यादव,शम्मी हाशमी, पूर्व वार्ड पार्षद धीरज कुमार एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शरण श्रीवास्तव आदि ने कांव नदी के पानी का जल संचय कर मछली पालन एवं तैराकी प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

क्या कहते है अधिकारी– कांव नदी की मिटते अस्तित्व के सवाल पर अनुमंडलाधिकारी हरेन्द्र राम ने बताया कि कांव नदी के कायाकल्प को लेकर जिला प्रशासन द्वारा मास्टर प्लान बनाए जाने की कवायद जारी है। अनुमंडलाधिकारी ने बताया कि नावनगर के रूप सागर के निकट कांव नदी पर डैम बनाए जाने को लेकर सरकार के पास प्रस्ताव भेजे जाने की कवायद जारी है।