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पुण्य तिथिः जब तक सूरज-चांद रहेगा द्वारिका केशरी का नाम रहेगा…..यह नारा आज भी उनकी याद में गूंज उठता है

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डुमरांव के दानवीर-कर्ण की संज्ञा से नवाजे गए कांग्रसी नेंता व पूर्व पार्षद द्वारिका केशरी खुले हाथो से गरीब के बेटियों की शादी के लिए करते थे दान।उनकी पत्नी मीरा देवी नगर परिषद की चेयरमैन रह चुकी है।

बक्सर/अरूण विक्रांत। जब तक सूरज चांद रहेगा, द्वारिका केशरी का नाम रहेगा।यह नारा डुमरांव के दानवीर कर्ण की संज्ञा से नवाजे गए नगर पार्षद सह कांग्रेस के कदद्ावर नेंता द्वारिका केशरी के जनाजे की जुलूस में शामिल अपार भीड़ में 23 जनवरी 2003 को लग रहा था।उस महान विभूति के अर्थी जुलूस में इस पत्रकार को भी शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।आप मानें अथवा नहीं मानें। पर यह कटु सत्य है।सत्ययुग के द्वारिका जी के नाम का वर्णन किताबों में पढ़ने को मिला है।लेकिन कलियुग के द्वारिका जी को निकट से समझने का मौंका भी इस पत्रकार को मिला था। कलियुग में पैदा हुए द्वारिका केशरी स्वभाव से सत्ययुग के द्वारिका जी की तरह थे।

‘लोकप्रियता ने उनके गुप्त शत्रु पैदा कर दिए थे‘
भले ही डुमरांव नगर के जंगलबाजार के निवासी द्वारिका प्रसाद केशरी पेशे से टार्च व बैट्री के मशहूर व्यवसायी थे।लेकिन द्वारिका केशरी मूल चरित्र से समाजसेवी व प्रदेश स्तरीय कांग्रेस पार्टी के नेंता थे।वे अपना कारोबार कर्मचारियों पर छोड़ रखा था।उन्होनेे कारोबार वाले कार्यालय को ही जनता जर्नादन से मिलने जुलने का कार्यालय बना लिया था।स्व.केशरी के मिलनसार स्वभाव व मृदुभाषिता ने इस कदर लोकप्रिय बना दिया था कि हर राजनीतिक दल के हाईकमान की निगाहें उन पर बन गई थी। डुमरांव की हरेक जनसरोकार के सवालो में यथा बिजली, पानी एवं सड़क को लेकर लड़ाई लड़ने के लिए द्वारिका केशरी के कदम स्वभाविक रूप से बढ़ जाते थे। द्वारिका जी के कदम जिधर बढ़ जाता था। स्थानीय नागरिकोे की भीड़ उनके साथ स्वतः जुड़ जाता था। उनकी लोकप्रियता से घबड़ाए क्षेत्रीय स्तर पर उनके गुप्त शत्रु भी पैदा हो गए थे। बावजूद द्वारिका केशरी ने समाजसेवा व राजनीति से अपना कदम पीछे नही हटाया।नागरिको ने उनकी दानवीरता व समाजसेवा के रिर्टन में द्वारिका केशरी व उनकी पत्नी मीरा केशरी को पार्षद चुना। इसी क्रम में उनका देहांत हो गया। बाद में उनकी पत्नी मीरा देवी डुमरंाव नगर परिषद की चेयरमैंन चुनी गई।

‘राजनीतिक विरोधी भी उदार स्वभाव व दानवीरता के प्रशंसक थे‘
स्व.द्वारिका केशरी ने अपने करीब 25 सालो के राजनीतिक व सामाजिक जीवन में पैतृक संपति के बूते व्यवसाय खड़ा करने के बीच गरीबो व मजलूमोें की सहायता पूरे तन,मन व धन से करने मे कभी पीछे नहीं हट सके। इतिहास गवाह है। इस शहर के मशहूर अधिवक्ता शंभू शरण नवीन, जनता दल यू के नेता भरत मिश्रा, नगर परिषद पूर्व उपाध्यक्ष नागेन्द्र नाथ तिवारी, स्व.ललन सिंह यादव, चुनमुन प्रसाद वर्मा, समाजसेवी प्रदीप शरण, ललन सिंह कुशवाहा, शिक्षक भाष्माकर दुबे के आलावे नामचीन राजनीतिक व्यक्तित्व मे कांग्रेस पार्टी के पूर्व केन्दीय कोषाध्यक्ष स्व.सीताराम केशरी, पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी,स्व.लालमुनि चैबे सहित अन्य कई से उनका सीधा जुड़ाव था। इस शहर के सिनीयर सिटीजन सत्यनारायण प्रसाद व दशरथ प्रसाद विद्यार्थी ने स्व.द्वारिका केशरी के कृतित्व व व्यक्तित्व की तारीफ की और कहा कि द्वारिका केशरी एक जूझारू व संर्घषशील साथी थे।

संक्षिप्त परिचय- बक्सर जिला के डुमरांव नगर स्थित जंगलबाजार निवासी बिहारी लाल केशरी चार पुत्रों मे द्वारिका केशरी मझोले पुत्र थे। स्व. द्वारिका केशरी को विवाहित पांच पुत्री एवं अखिलेश कुमार केशरी पुत्र है। अखिलेश भी अपने पिता के आचरण का आत्मसात कर रखा है।

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