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शराबी ने कुल्हाड़ी से किया पुलिस पर हमला, सिपाही समेत ASI घायल, शराबबंदी का दिखा नमूना

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बक्सर/ बीपी टीम : सूबे में शराबबंदी लागू होने के बाद इसके अनुपालन कराने में पुलिस वालों के भी पसीने छूट रहे हैं। जिसका ताजा उदाहरण बक्सर जिले के मुरार थाना क्षेत्र का है, जहां शराब पीकर हंगामा कर रहे शराबी को पकड़ने गई पुलिस पर ही शराबी ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। इस दौरान पुलिसकर्मी किसी तरह अपनी जान कुल्हाड़ी से बचा पाए। वहीं पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए युवक को अपने कब्जे में दबोच लिया। मगर शराबी अपने आप को छुड़ाने के लिए दांतो से और मुक्को से हमला करने लगा। इस हमले में मुरार थाना के एक एएसआई राजकुमार समेत एक सिपाही जख्मी हो गया है। जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की स्थिति सही बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक मुरार थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र के ओझा बरांव गांव में एक शराबी शराब पीकर हंगामा कर रहा हैं। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस को देखते ही हंगामा कर रहे शराबी ने पुलिस पर ही लकड़ी काटनेवाले टांगी से हमला कर दिया। हालांकि इस हमले में पुलिस वाले किसी तरह बाल-बाल बच गए, लेकिन नशे में धुत शराबी कहां मानने वाला था। उसने पलट कर ASI को दांत काट लिया, जिसके कारण उसके हाथों में गंभीर निशान हो गए। वहीं एक सिपाही को भी मामूली रुप से चोटें आई हैं। दोनों का स्थानीय तौर पर प्राथमिक उपचार करा लिया गया है।

मामले की जानकारी देते हुए घायल एसआई ने बताया कि पुलिस को शराब पीकर हंगामा करने की सूचना मिली थी। इसी सूचना पर हम लोग गए थे। इससे पहले कि कुछ समझ पाते शराबी ने हमला कर दिया, जिसमें किसी तरह से हम लोग बाल-बाल बचे। हालांकि उसके द्वारा दोबारा हमला किए जाने के कारण उनके साथ एक सिपाही भी जख्मी हो गया। फिलहाल शराबी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। वही शराबी से पूछने पर शराबी सोनू ओझा ने बताया की मुर्गा शराब की पार्टी चल रही थी उसी में हमने पी रखी थी अपने आप को बचाने के लिए हमने इस तरह का काम किया है।

बहरहाल बिहार में शराबबंदी होने के बाद जिस प्रकार पुलिस महकमे का 50% से ज्यादा काम शराब तथा शराबियों में समय लग रहा है। फिर भी शराब बंद होने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन कहीं ना कहीं बड़ी खेप पकड़ी जा रही है। फिर भी शराब की होम डिलीवरी भी हो रही है। अब इस प्रकार पुलिस पर हमले भी हो रहे हैं। शराबबंदी की धरातल की सच्चाई कुछ और है। इस पर बिहार सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए।

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