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बीते साल व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण का मामला अधर में लटका रह गया

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-नूतन बर्ष में व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक -अधिकारियों के आवास निर्माण को नागरिको की लगी है आस

अरूण विक्रांत,डुमरांव(बक्सर) डुमरांव में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के 6 साल गुजर गए। पर व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक अधिकारियोें के आवास निर्माण का मामला अधर में लटका रह गया। अलबता पशुपालन विभाग (हरियाणा फार्म) के द्वारा उधार में दिए गए भवन में व्यवहार न्यायालय चलता रहा।

बीते साल व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण के लिए स्थानीय अनुमंडल प्रशासन द्वारा 6.7 एकड़ पशुपालन विभाग के जमीन का चयन कर विधि विभाग को उपलब्ध कराया गया। लेकिन विधि विभाग को उक्त जमीन पसंद नहीं आया। नतीजतन व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण का मामला लटका रह गया।

हुआं यूं कि बीती साल हाई कोर्ट के तत्कालिन मुख्य न्यायाधीश द्वारा अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण करने के बाद डुमरांव अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण के लिए चयनित जमीन का मुआयना किया गया। पर मौंके पर हाईकोर्ट के तत्कालिन मुख्य न्यायाधीश ने जमीन को अयोग्य ठहराते हुए अन्य जमीन उपलब्ध कराए जाने को आदेश जारी कर दिया गया।

साथ ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग(भू-अर्जन निदेशालय) के प्रधान सचिव व विधि विभाग के आदेश पर अनुमंडल प्रशासन व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण के लिए नए जमीन खोजने में जुटा रहा। काफी मशक्कत के बाद अनुमंडल प्रशासन ने बीते साल जनवरी माह में ही रैयती जमीन के आलावे पशुपालन विभाग की अन्य नए जमीन को भी खोज निकाला।

इस प्रकार साल 2021 विदा हो गया और प्रशासन द्वारा खोजे गए व चयनित जमीन के संर्दभ में विधि विभाग से हरी झंडी भी नहीं मिल सकी। अब इस अनुमंडल क्षेत्र के नागरिको सहित अधिवक्ताओं को नए साल 2022 में व्यवहार न्यायालय के भवन व न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीदें टिकी हुई है।

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