भोजपुरी भाषा के द्वितीय शेक्सपीयर कहे जाने वाले कवि ‘शैदा‘ जी अपनों के बीच उपेक्षित

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धन्य ह भोजपुर के माटी ना कोई आटल बा ना कोई आटी…भोजपुरी कवि ‘शैदा‘ जी की समारोह पूर्वक मनाई गई जंयती।

Buxar, Vikrant: डुमरांव नगर के लाल भोजपुरी भाषा के द्वितीय शेक्सपीयर कहे जाने वाले मशहूर कवि विश्वनाथ प्रसाद उर्फ शैदा जी की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। मौंके पर आंगतुकों द्वारा उनके तैल्य चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें याद किया। नगर के राष्ट्रीय युवा क्रांति कमिटि के सौजन्य से आयोजित समारोह की अध्यक्षता संजय कुमार चंद्रबंशी ने की।संचालन शिक्षक विशोका चंद ने किया। समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शैदा जी द्वारा भोजपुरी भाषा में रचित कई रचनाएं आज भी लोगों के बीच जीवंत है। वक्ताओं ने कहा कि पेशे से शिक्षक शैदा जी हास्य व व्यंग्य की कविता चलते-चलते लिख दिया करते थे।

वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा सम्मानित भोजपुरी भाषा के कवि शैदा जी आज भी अपनों के बीच उपेक्षा के शिकार है। वक्ताओं ने कहा कि पेशे से शिक्षक रहे विश्वनाथ प्रसाद उर्फ शैदा जी को डुमरांव राज परिवार से जीवन भर सम्मान व सहयोग मिला। वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार द्वारा मरहूम कवि शैदा जी व उनके परिजनों की सुधि लेने की कभी जरूरत महसूस नहीं की गई।

वक्ताओं ने कहा कि स्व.शैदा जी द्वारा डेढ़ दर्जन से अधिक भोजपुरी भाषा में कविता संग्रह रचना की गई है। समारोह को प्रभुनाथ यादव,जंगबहादुर सिंह, दिनेश कुमार, ललन कुशवाहा, गोपाल प्रसाद गुप्ता, अर्जुन शमसुद्दीन ,संतोष प्रसाद एवं सरल चैधरी नें संबोधित किया। वहीं स्थानीय बांसुरी वादक बिजली राम ने स्व. शैदा जी की स्मृति में अपने बांसुरी वादन कला को प्रर्दशित किया।

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