दीवगंत बबन उपाध्याय जी के साथ जुड़ा एक संदर्भ साक्षी रहे प्रो सचिदानंद श्रीवास्तव और दिलीप बजाज

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Buxar,BP. आज हम लोगो के बीचबक्सर जिला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बबन उपाध्याय जी नहीं रहे. आज उनका निधन हो गया. पर पत्रकारिता जीवन में उपाध्याय जी से हुई वार्तालाप जेहन मे है.बात वर्ष 1994 /95 की है. ललन चौबे जी के बाद ही बबन उपाध्याय जी जिलाध्यक्ष बने थे. उपाध्याय जी सीधा सादा भाजपा नेता रहे.मेरे जैसे उज़बूक पत्रकार से चौक भगत सिंह पार्क के सामने भीड़ गए थे.उस समय वहां भगत सिंह जी नहीं थे. एक छोटा सा पावर हाउस का कमरा था और एक सीढ़ी बिजली मिस्त्री के लिए टंगी रहती थी.

मैं, हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया का बक्सर का स्ट्रिंगर था, चौक पर देखते ही प्रो श्रीवास्तव ने इशारा किया कि यही पत्रकार है, मुझे देखते ही उपाध्याय जी उखड़ गए बोले की भाजपा की खबर क्यों नहीं छपती है, मैंने विनम्रता से बताया कि बक्सर भाजपा को यह भी नहीं पता है कि खबर कैसे भेजी जाती हैं.

आप कार्यक्रम करें, मीडिया को सूचित करें और फिर कोई नहीं पहुंचे तो प्रेस विज्ञप्ति जारी करे. श्री उपाध्याय जी इसी पर तिलमिला गये। उस समय तक वे मानते थे कि मिडिया खुद ब खुद उनके कार्यक्रम को कवर करेगा यह उसकी जिम्मेदारी है।मैं उज़बूक था, भिड़ गया. उसका शाप यही मिला कि मैं मीडिया से बाहर हो गया और उन के पुत्र अविनाश उपाध्याय मीडिया में आ गए. जो इन दिनों पत्रकारिता जगत के पीच पर जमे हुए है.(पूर्व पत्रकार के. ओझा बक्सर की लेखन पर आधारित)