चंपारण: चंपारण सत्याग्रह और गांधी पर 60 दिनों में बनने वाली “नील क्रांति” फिल्म का शुभारंभ

मोतिहारी/प्रतिनिधि: महात्मा गांधी जी की चंपारण सत्याग्रह के 103 वर्ष पूरे होने पर सुषमा फिल्म द्वारा नीलहो आंदोलन के पटकथा पर 60 दिनों में बनने वाली फिल्म ” नीलक्रांति ” का शुभारंभ आज मोतिहारी के ऐतिहासिक गांधी संग्रहालय स्थित स्मारक  स्तंभ से किया गया। स्मारक पर वयोवृद्ध गांधीवादी एवं संग्रहालय के सचिव बृजकिशोर सिंह ने मुहूर्त का पहला शाट शार्ट दिया। वहीं वरिष्ठ पत्रकार सह स्वतंत्रा सेनानी उत्तराधिकारी अशोक वर्मा ने नारियल फोड़ फिल्म निर्माण का शुभारंभ किया ।



फिल्म मुहूर्त के अवसर पर बृजकिशोर सिंह ने बताया कि इसी गांधी स्मारक स्तंभ पर ब्रिटिश काल में एसडीओ कोर्ट था। जहां गांधी जी ने ऐतिहासिक बयान देकर अंग्रेजों को चुनौती दी थी। वहीं इस फिल्म के कथाकार स्वयं बृजकिशोर सिंह हैं। समारोह को संबोधित करते हुए फिल्म निर्माता-निर्देशक डी के आजाद ने फिल्म के प्रारूप को विस्तार से बताया । कहा कि यद्यपि चंपारण के फिल्मकारों के पास फिल्म निर्माण के संसाधनों की काफी कमी है, बावजूद अपनी प्रतिबद्धता के कारण मैंने यह जोखिम भरा निर्माण कार्य एक बार पुनः आरंभ किया है।

मुंबई फिल्म नगरी में हमारे जैसा निर्माता भीड़ में खो जाएगा या फिर किसी की गुलामी ही करनी पड़ेगी, उस से बेहतर है कि अपने चंपारण में हम लोग यहां के जो विषय और समस्याएं उस पर फिल्म का निर्माण करें। मैंने गांधी विचार को इस फिल्म के द्वारा नई पीढी को अवगत कराने के लिए ही इस फिल्म का निर्माण कार्य कर रहा हूं। गौरतलब है कि सुगौली निवासी डीके आजाद अब तक कई फीचर फिल्म का निर्माण कर चुके हैं साथ-साथ उन्होंने काफी संख्या में डॉक्यूमेंट्री फिल्मे भी बनाई है। संबोधित करने वालों में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी अनीता निधि, डॉ पुष्पा किशोर आदि थे।

निर्माता डीके आजाद ने फिल्म निर्माण में लगे एक दर्जन से अधिक लोगों का परिचय मंच पर कराया और उन्होंने कहा कि फिल्म में एक सौ से अधिक कलाकार एवं तकनीशियन है। मुंबई के भी कई कलाकारों को हमने इसमें शामिल किया है। फिल्म बेहतर से बेहतर हो यह हमारा प्रयास होगा। बृज बाबू लिखित गांधी जी की जो पुस्तक है, उसी पटकथा पर यह फिल्म बन रही है। गांधी पर वैसे काफी फिल्में बनी है। लेकिन, मेरा यह प्रयास होगा कि गांधी जी के मूल सिद्धांत और नीति को जीवंत करें। जिसस नई पीढ़ी को हिंसा की ओर हो रहे भटकाव को रोका जा सके।