चिंतन में बदलाव के लिए स्मृतियों में परिवर्तन किये जाते रहे हैं: अशोक बेरी

चंपारण/राजन दत्त द्विवेदी: लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र व एमजीसीयू बिहार के वाणिज्य संकाय के संयुक्त तत्वावधान में आज विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम हुआ। जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की। मुख्य अतिथि प्रख्यात सामाजिक चिंतक अशोक बेरी ने अपने संबोधन में कहा कि जब-जब समाज के बदलाव हेतु चिंतन में परिवर्तन की आवश्यकता पड़ती है और तब-तब स्मृतियों में परिवर्तन किए जाते हैं। हमें मिलकर विचार करना होगा कि परिवार, समाज एवं राष्ट्र पर किस प्रकार के संकट आते हैं।



समाज को, राष्ट्र को सुंदर रूप देने के लिए हमें अपनी लोक परंपराओं को स्थापित करना होगा। सहजता एवं सजगता से अपनी जीवनदृष्टि विकसित करनी होगी। कुलपति श्री शर्मा ने कहा कि भाषा वाहन मात्र है। परम्पराएं हमारी सामूहिक, समेकित अभिव्यक्ति का माध्यम मात्र हैं। वे माध्यम हैं हमारी पहचान का, वे माध्यम हैं हमारी अस्मिता का, वे माध्यम हैं हमारी सामूहिक चेतना का। परम्पराओं के परिमार्जन की प्रक्रिया साथ-साथ चलती है।

हम सभी इसके साक्षी हैं। वहीं इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मंगलाचरण से हुआ। केंद्र निदेशक प्रो.राजेन्द्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज में रहने वाले मनुष्य के जीवन में परंपरा का महत्वपूर्ण स्थान है। विश्व की प्राचीन संस्कृतियों में से एक भारतीय संस्कृति अपने भीतर इन्हें समाहित किए हुए है। स्वागत व परिचय डॉ. अंजनी कुमार झा एवं डॉ. शिवेंद्र ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बिमलेश सिंह एवं कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. श्वेता ने की।