‘पुरखा-पुरनिया’ संवाद कार्यक्रम में याद किए गये संस्कृति कर्मी, रंगकर्मी बी प्रशांत

मुजफ्फरपुर (ब्रह्मानन्द ठाकुर) : जनवादी साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी बी०प्रशान्त जी के 89 जयंती समारोह “पुरखा -पुरनिया” संवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत सरला श्रीवास सामाजिक -सांस्कृतिक शोध संस्थान द्वारा आज आयोजित किया गया। मालीघाट में डाक्टर एस० एस० बिहारी जी की अध्यक्षता में समारोह की शुरुआत अंगुठी के नगीना ‘ गीत की प्रस्तुति से किया गया। । पुरखे पुरनिया को याद करते हुए भोजपुरी के राष्ट्रीय गीत बटोहिया के सुंदर सुभूमि भैया भारत के देशवा से ‘ गीत की प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

संस्कृतिकर्मी शिक्षक बैजू कुमार ने इस अवसर पर कहा कि आज देशभर में समस्त आंदोलनों में बी० प्रशान्त जी के गीत गाये जाते हैं.। उन्होने शिक्षा ,साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र मे बी प्रशांत के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि वे आजीवन जनवाद को जीते रहे।प्रेमचंद जयंती समारोह समिति और शिक्षा बचाओ समिमिति मे रहते हुए उन्होने नई पीढी का हमेशा मार्गदर्शन कियाः। उन्होने कहा कि पुरखा -पुरनिया संवाद कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे ही तमाम जनवादपसंद , साहित्यकार , संस्कृतिकर्मी की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए जारी रहेगा। यह आयोजन शहर के साथ- साथ सुदूर ग्रामीण अंचलों मे भी किऊ जाने की योजना है।

इस अवसर पर एस० यू० सी० आई पार्टी से अरविंद कुमार ने वाले द्यनाथ झा प्रशांत को याद करते हुए कहा कि बी ० प्रशान्त जी ताउम्र जनवादी आंदोलनों ,संस्कृतिकर्म में बढ़चढ़कर भूमिका का नार्वाह करते रहे।. मुजफ्फरपुर शहर सामाजिक -सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ नई पीढ़ी के निर्माण में उनका बहुमूल्य योगदान था।

लोक कलाकार सुनील कुमार ने बी० प्रशान्त जी के जन्मोत्सव समारोह में गीतों में बी० प्रशान्त की शुरुआत उनके द्वारा लीखें गीत… जो मेहनतकश इंसानों के वास्ते हुए कुर्बान उनको मेरा लाल सलाम से की उसके बाद जनवादी रचनकार को याद करते हुए घर घर में मचल कोहराम ई झगड़ा कईसे मीटे ….बढ़े मजूर उनके साथ चल रहे किसान उठो निशान थाम कर वतन के नौजवान…जीना हैं तो मर जाना सीखों ,हर जुल्म से टकराना सीखों …..गाए चलो जिन्दगी के गीत ….छेड़ो ऐसे इन्कलाबी तान को जनवादी स्वर प्रदान की.

वहीं मुख्य रूप से समाजसेवी अविनाश सेवादार ,धीरज कुमार, अमिय रंजन, अनीता कुमारी, विधासागर सागर ,दिनेश प्रसाद, शैलेन्द्र ठाकुर, शशि रंजन वर्मा, दिनबंधु महाजन, रजनी राजन, कृष्ण नंदन ठाकुर, मोहम्मद अबदुल्ला, मोहम्मद एहसान, भोला साह,विजय मिश्रा, पुर्निमा कुमारी, प्रमिला देवी ,नन्दनी वर्मा ने श्रद्धा सुमन अर्पित की.

धन्यवाद ज्ञापन सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान की मुख्य संरक्षक श्रीमति कांता देवी जी द्वारा दिया गया और बताई की गांव-समाज, जिला -जवार के पुरखा पुरनिया को याद करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का एक अभियान “पुरखा-पुरणिया”संवाद कार्यक्रम लगातार चलाया जायेगा.