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गया: गलत आरोप लगाकर मुकदमा वापस लिये जाने का बनाया जा रहा दबाव

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गया(पुरूषोतम कुमार): बोधगया में गरीब बच्चों और असहाय को मदद करने के लिए जनवरी 2003 में जेनअमिताभ वेलफेयर ट्रस्ट का निबंधन कराया गया था। जिसका अध्यक्ष फ्रांस कि एक महिला जेनी उर्फ मम्मी जी को मनोनित किया गया था। इस संस् था के द्वारा बोधगया सहित कई जगहों के वैसे बच्चों जिनके माता-पिता आर्थिक रूप से असमर्थ हैं उन्हें निशुल्क शिक्षा के साथ-साथ शिक्षण सामग्री व रहने कि व्यवस्था कि जाती रही है। बुधवार को बोधगया के बिगहा स्थित जेनअमिताभ वेलफेयर ट्रस्ट के बोडिंग स्कूल में संस्था के सचिव विक्रम आनंद व वर्तमान अध्यक्ष राजीव कमल ने संयुक्त रूप से प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि गलत आरोप लगाकर पूर्व मे हुए मुकदमे को वापस लिये जाने का दबाव दिया जा रहा है।

आनंद ने बताया कि जेनी उर्फ मम्मी जी जेनअनिताभ वेलफेयर टंस्ट की अध्यक्षा थी तथा उनकी अध्यक्षता में विदेशो से मिलने वाले डोनेशन संस् था के खाते में सिधे आती थी जिसे संस् था में शिक्षण प्राप्त कर रहे गरीब बच्चों व यहां कार्यर शिक्षक और कर्मचारियों के उपर खर्च कि जाती थी पर अप्रेल 2015 में जेनी उर्फ मम्मी जी गलत तरीके से मिलने वाले डोनेशन को संस् था के खाते में न मंगवाकर किसी दुस री माध्यम से मंगाया करती थी। जेनी उर्फ मम्मी जी और संस् था का डंइवर मुन्ना पासवान दोनो की मिली भगत से संस् था के 40 लाख रूपया का गबन किया गया था। जिसके आरोप में संस् था के सदस्य ने फैसला कर उन्हे संस् था से हटा दिया गया था। और इन दोनों पर बोधगया थाना में 11 अप्रैल 2015 को संस् था के सचिव विक्रम आंनद ने मुकदमा दर्ज किया था।

जिसका बोधगया थाना में कांड संख्या 131/15 दर्ज है। उक्त मुकदमे में धारा 420,406,467,468,471,451,380,120 1⁄4ठ1⁄2 आईपीसी दर्ज है। 5 मई 2018 को न्यायालय के द्वारा जेनी उर्फ मम्मी जी एवं मुन्ना पासवान पर चार्जसिटेड कर दिया गया, व मुकदमे की सुनवाई लगातार न्यायालय के द्वारा कि जा रही है। इसी मुकदमे के वापस लेने के लिए हमेशा गलत-गलत आरोप लगाकर दवाब देने कि कोशिस कि जा रही है। कभी संस् था के बच्चों पर चोर का आरोप लगाया जा रहा है तो कभी झुठा प्रेस वार्ता के माध्यम से गलत-गलत खबर पैस ों के बल पर छपवाया जा रहा है। संस् था के सचिव ने यह भी बताया कि ‘मम्मी जी’ के द्वारा संस् था के बच्चों को हाथ पैर में पट्टी बंधवा कर तथा हाथ में कटोर देकर भिख मांगने का काम भी दिया जाता था। इसका लगातार विरोध सचिव विक्रम आंनद ने किया पर मम्मी जी एक न सूनी।

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