महाबोधि मंदिर में ज्ञान- आशा व शांति के लिए की गई विशेष प्रार्थना

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गया(पुरूषोत्तम कुमार): महाबोधि मंदिर व बोधिवृक्ष हमेशा लोगों में ज्ञान व आशा का दीप जलाते हैं। आशा ही है, जो हमें शांति के रास्ते पर चलने को प्रेरित करती है। इसके बिना सभ्य समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। महाबोधि मंदिर परिसर में शनिवा को ज्ञान-आशा व शांति के लिए 3333 मोमबत्तियां प्रज्वलित करने के बाद यह बात बीटीएमसी सचिव नांजे दोरजे ने कही। उन्होंने कहा कि आशा ही है, जिससे हम आगे बढ़ सकते हैं।



फ़ोटो-मनीष भंडारी

हमें हर हाल में शांति की आशा रखनी होगी। आशा हमें हतोत्साह से बचाता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मौके पर विशेष प्रार्थना भी की गई। इसका आयोजन अमेरिका की नींदा पिछले तीन सालों से बोधगया में कर रहीं हैं। उन्होंने बताया कि जब भी ज्ञान-आशा व शांति की बात करते हैं, तब इसके लिए बोधगया से बेहतर दूसरा स्थान नहीं होगा। इसके अलावा 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में आतंकी कार्रवाई में सीआरपीएफ के मारे गए 44 जवानों की याद में भी 44 मोमबत्तियां जलाई गईं।

बीटीएमसी सचिव नांजे दोरजे एवं सदस्य डा. अरविंद कुमार सिंह ने इस मौके पर मोमबत्ती प्रज्वलित की। इस मौके पर महाबोधि मंदिर के मुख्य भिक्षु चालिंदा, भिक्षु दीनानंद, भिक्षु डा. मनोज, दीपान भंते, कोंडण्य भंते, छेरिंग लामा, धम्मिका भंते, शासन भंते सहित अन्य लोग मौजूद थे। मोमबत्तियां मंदिर परिसर के बटर लैंप हाउस के निकट जलाई गईं।