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बेगूसराय से जमशेद अशरफ हो सकते हैं NDA के उम्मीदवार, नीतीश सरकार में संभाल चुके हैं कई अहम विभाग

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पटना (नियाज़ आलम) : लोकसभा चुनाव 2019 को एक महीने से कुछ ही ज्यादा समय रह गया है। माना जा रहा है कि मार्च के पहले हफ्ते में चुनाव की तिथि की घोषणा भी कर दी जायेगी। ऐसे में बिहार के अलग अलग लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर सभी दलों में मंथन जारी है। हालांकि अंदर खाने ज्यादातर सीटों पर महागठबंधन और एनडीए में उम्मीदवारी लगभग तय हो चुकी है। केवल औपचारिक घोषणा बाकी रह गई है।

इसी क्रम में बेगूसराय सीट पर जहां महागठबंधन से जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है, वहीं एनडीए ने भी इसका तोड़ लगभग तलाश कर लिया है। सूत्रों की मानें तो बेगूसराय में कन्हैया कुमार के आभामंडल को तोड़ने के लिए एनडीए के उम्मीदवार के तौर पर पूर्व मंत्री जमशेद अशरफ का नाम लगभग तय माना जा रहा है।

बेगूसराय के जातिगत समीकरण को देखते हुए भी जमशेद अशरफ एनडीए के लिए काफी मुफीद साबित हो सकते हैं। मतदाताओं की संख्या के आधार पर बात करें तो यहां भूमिहार का वोट लगभग साढे तीन लाख, मुस्लिम लगभग ढाई लाख और यादव लगभग डेढ़ लाख के आसपास हैं। ऐसे में महागठबंधन के ‘माई’ यानी मुस्लिम यादव समीकरण को भेदने में जमशेद अशरफ की भूमिका काफी कारगर हो सकती है।

बहुसंख्या वोट बैंक में भी जमशेद अशरफ की काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इतना ही नहीं, जिले में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण युवा वर्ग में भी जमशेद अशरफ काफी लोकप्रिय हैं। ऐसे में युवा मतदाताओं के समर्थन के लिहाज से भी कन्हैया कुमार के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

बता दें कि बेगूसराय सीट पर भाजपा कोटे से दावेदारी के लिए पार्टी के एमएलसी रजनीश कुमार, पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व लोकसभा उम्मीदवार राम लखन सिंह और बेगूसराय के मेयर उपेंद्र सिंह भी रेस में हैं। हालांकि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जिले के जातिगत समीकरण के लिहाज से भी यह माना जा रहा है कि पूर्व मंत्री जमशेद अशरफ एनडीए के लिए लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकते हैं।

कौन हैं जमशेद अशरफ
लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े जमशेद अशरफ ने साल 2005 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उन्होंने बलिया बेगूसराय से उस समय के शहरी विकास मंत्री श्रीनारायण यादव को लगभग 18000 वोटों से पछाड़कर सदन तक पहुंचे। साल 2006 से 2009 तक बिहार हज कमेटी के चेयरमैन रहे। इसके साथ साल 2008 से 2010 तक नीतीश सरकार में मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने निबंधन एवं मद्य निषेध जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

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