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2014 का साल फेसबुक का था, तो 2019 Whatsapp का है : प्रशांत किशोर

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पटना : देश में लोकसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई है. सभी पार्टियां अपने-अपने तरीके से इसकी तैयारी में जुट गई हैं. चुनाव रणनीतिकार और जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने मंगलवार को जदयू के प्रदेश कार्यालय में करीब 2000 युवक-युवतियों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। जदयू का झंडा थाम ये युवा काफी खुश थे। इसी क्रम में उन्होंने मीडिया से भी बात की।

उन्होंने कहा कि एक लाख युवाओं को जदयू से जोड़ना तो हमारा प्रारंभिक लक्ष्य है। यह लक्ष्य तो हम छह माह में ही पूरा कर लेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय के माध्यम से जिस तरह युवा वर्ग एवं छात्रों के हित में कार्य किए हैं, आने वाले दिनों में पांच से 10 लाख युवा जदयू से जुड़ें तो कोई आश्चर्य नहीं।

पीके ने कहा कि हम सिर्फ नामांकन पर्चे की संख्या को सदस्यता का आधार नहीं बना रहे हैं। जो सदस्यता लेने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, उन्हें पार्टी कार्यालय आमंत्रित कर पहले नीति-रीति से अवगत कराया जा रहा है। उनसे जब पूछा गया कि आपने चुनाव प्रचार के पारंपरिक तरीके को बदलकर इवेंट बना दिया, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। बस वक्त के साथ चले हैं हम। फिर समय के साथ तो हर किसी को चलना ही होगा।

उन्होंने सोशल मीडिया पर हो रहे चुनाव प्रचार को लेकर कहा कि 2014 का साल फेसबुक का था, तो 2019 व्हाट्सएप का है। आगे अभी दूसरे एप का जमाना आ रहा है। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में व्‍हाट्सएप का ही जादू चलेगा। इसलिए समय के साथ ही चलना चाहिए.

बता दें कि प्रशांत किशोर ने मंगलवार को राज्य भर के 2 हजार लोगों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। रालोसपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रहे चुन्ने खान के नेतृत्व में रालोसपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के 22 स्टेट पदाधिकारी, 30 जिला अध्यक्ष और 2 प्रमंडल पदाधिकारियों समेत सैकड़ों समर्थकों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसमें प्रदेश उपाध्यक्ष कलीम रिजवी और प्रदेश महासचिव परवेज आलम भी शामिल हैं। 

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