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कबीर महोत्सव में बोले तेजस्वी- आज भी देश में गैर-बराबरी का माहौल

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पूर्णिया (राजेश कुमार झा) : कबीर के काल में जो देश में गैर बराबरी का माहौल था. वह स्थिति आज भी कायम है. वर्ण व्यवस्था और छुआछूत कायम है और समाज मे जहर फैलाया जा रहा है।ऐसे में आज कबीर के विचार सबसे अधिक प्रासंगिक हैं। उक्त बातें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को कोर्ट स्टेशन मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कबीर महोत्सव को संबोधित करते हुए कही।

अपने पिता लालू की चर्चा करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि आप लोगों ने उन्हें आशीर्वाद देकर उस मुकाम तक पहुँचाया जहां उन्होंने समाज में व्याप्त गैरबराबरी को समाप्त करने का प्रयास किया। कहा कि वे खजूर की तरह नहीं बनना चाहते जो छाया नहीं दे सकता बल्कि सेवक की तरह रहना चाहते हैं। तेजस्वी ने कहा कि हमारी शक्ति जनता है और जनता से ही लड़ाई लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।

बाद में पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी यादव ने जीतनराम मांझी के 20 सीट वाले बयान पर कहा कि हमसे उन्होंने ऐसी बात नहीं कही है। ऐसे भी सीटों पर बातचीत मिलकर और बैठकर तय होगा।सांसद पप्पू यादव के सवाल पर उन्होंने कहा कि पप्पू यादव गद्दार हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पैसे से हेलीकाप्टर पर घूमकर मेरे परिवार को गाली देने का काम किया।

उन्होंने कहा कि बिहार में लॉ एंड आर्डर की स्थिति ध्वस्त हो चुकी है और चाचा आल इज वेल कह रहे हैं। इस मौके पर सांसद बुलो मंडल, विधायक नीरज यादव, अरुण यादव, आदित्य केजरीवाल, बिपिन यादव उर्फ दबूल यादव आदि मौजूद थे।

नेता प्रतिपक्ष के संबोधन के मुख्य बिंदु-
1-समाज में व्याप्त गैर बराबरी के समूल नाश के लिए संत कबीर आज सबसे ज्यादा प्रासंगिक है.

2-आज की ही तरह कबीर के समय में देश संकट की घड़ी से गुजर रहा था। सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह से डगमगाई हुई थी। अमीर वर्ग, वैभव – विलासिता का जीवन जी रहा था, वहीं गरीब दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहा था। हिन्दू और मुस्लिम के बीच जाति – पांति, धर्म और मजहब की खाई गहरी होती जा रही थी। कबीर साहेब ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, बुराईयों को उजागर किया।

3-संत कबीर भक्तिकालीन एकमात्र ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने राम – रहीम के नाम पर चल रहे पाखंड, भेद – भाव, कर्म – कांड को व्यक्त किया था। आम आदमी जिस बात को कहने क्या सोचने से भी डरता था, उसे कबीर ने बड़े निडर भाव से व्यक्त किया था।

4-धार्मिक पाखण्ड का विरोध करते हुए कबीर कहते हैं भगवान को पाने के लिए हमें कहीं जाने की जरूरत नहीं है। वह तो घट – घट का वासी है। उसे पाने के लिए हमारी आत्मा शुद्ध होनी चाहिए। भगवान न तो मंदिर में है, न मस्जिद में है। वह तो हर मनुष्य में है।

कस्तुरी कुण्डली बसै, मृग ढूंढें बन माँहि
एसै घटि घटि राम हैं, दुनियाँ देखै नाँहि

आज भी अपने समाज में उंच नीच, जातिगत उत्पीड़न और घोर अमानवीय अन्याय के बीच कबीर साहेब के उद्देश्यों को हर गाँव और गली, हर शहर और मोहल्ले तक ले जाने की ज़रूरत है.

इसी के मद्देनज़र हमने अपनी पार्टी और सांसद मनोज कुमार झा से आग्रह किया अपनी सांसद निधि से धर्मस्वरूप साहेब जैसे अभिवावक की निगरानी में इस प्रांगण में कबीर बहुजन चेतना केंद्र सह पुस्तकालय, कबीर शोध संस्थान और कबीर वृद्धाश्रम की स्थापना की जाए और मुझे ख़ुशी है कि इस दिशा में कार्य प्रारंभ हो गया है.

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