मुजफ्फरपुर में आयोजित हुआ किसान पंचायत

मुजफ्फरपुर/ ब्रह्मानन्द ठाकुर: स्थानीय दामुचक रोड स्थित एक विवाह भवन में आज किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इस किसान पंचायत मे मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के सीतामढी ,दरभंगा ,समस्तीपुर ,भागलपुर ,पटना एवं उडीसा और उत्तरप्रदेश के किसान प्रतिनिधि के अलावे पत्रकार ,बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित त थे। किसान पंचायत की अध्यक्षता प्रोफेसर अवधेश कुमार और संचालन रमेश पंकज ने किया।


विषय प्रवेश कराते हुए गंगा मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अनिल प्रकाश ने कहा कि देश की दो तिहाई और बिहार की 88 प्रतिशत आबादी की जीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर है। फिर भी यहा के किसानों में इन तीनो कृषि कानून के विरुद्ध आंदोलन की कोई सुगबुगाहट नहीं है , यह चिंता का विषय है। उन्होने कहा का बिहार के सीमांत छोटे ,भूमिहीन ,ओर बटाईदार किसानों को कृषि कानून की बारीकियों और उसके दूरगामी दुष्प्रभाव से सही ढंग से अवगत कराने की जरूरत है। किसानों ,पशुपलकों , मतस्यपालकों को गोलबंद कर ही बिहार में किसान आऔदोलन तरह ज किया जा सकता है।


उडीसा से आए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति सदस्य हिमांशु तिवारी ने तीनो कृषि कानूनों को देश को एक बार फिर गुलाम बनाने वाला बतायाः उन्होने कहा कि कंट्रैक्ट फार्मिंग का कानून के तहत कम्पनियों छोटे ,बटाईदार और भूमिहीन किसानों से उनकी खेती वाली जमीन छीन कर उनको खान ती से बहुत दखल कर देगा। एम एस पी की चर्चा करते हुए उन्होने कहा कि शहर से जो सामान गाऔव मे आता है वह महंगा होता है और गाऔव से जो सब्जी ,फल ,दूध ,खाद्यान्न शहर जाता है तो सस्ता होता है। यह अब नहीं चलने वाला। किसानों को उसकी उपज का लाभकारी मूल्य देना ही होगा। बिहार के किसानों को संगठित होकर अपने हक के लिए उठ खडा होने की जरूरत हैः।


एसयूसीआईसी के राज्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया यह तीनो कृषि कानून पूंजीपतियों के हित मे लाया गया है। यह शोषित पीडित आम जनता के हित में नही है। उन्होने बिहार के गांव गांव मे किसानो के बीच जाकर कृषि कानून की बारीकियों सेअवगत कराने की आवश्यकता बताई ।
किसान पंचायत को पत्रकार दिनेश मिश्र , नवज्यति समेत अन्य किसान प्रतिनिधियौं नू भी संबंधी धित किया।