प्रकृति-पर्यावरण के संरक्षण में ही मानव का हित निहित: कुलपति

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मधेपुरा(रुपेश कुमार): प्रकृति-पर्यावरण के संरक्षण में ही मानव का हित निहित है। प्रकृति बचेगी, तभी मानव जीवन बचेगा। यह बात कुलपति डाॅ. अवध किशोर ने कही। वे आज बीएनएमयू के नार्थ कैम्पस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में  उद्घाटनकर्ताके रूप में बोल रहे थे। स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित सेमिनार का विषय प्राकृतिक आपदा और मानसिक स्वास्थय था। कुलपति ने कहा कि हमें प्रकृति के साथ मिलकर जीने की कला सीखनी होगी। हम प्रकृति का विवेकपूर्ण उपभोग करें।

महात्मा गाँधी ने कहा है कि यह धरती हम सबों की आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, लेकिन यह हमारी लोभ-लालच को पूरा नहीं कर सकती है। कुलपति ने कहा कि विकास की अंधदौड़ में हम प्रकृति-पर्यावरण से दूर जा रहे हैं और हम प्रकृति के दुश्मन बन गए हैं। हम जंगलों को काट रहे हैं, पहाड़ों को तोड़ रहे हैं और नदियों को बांध रहे हैं। इसके कारण प्राकृतिक असंतुलन की समस्या उत्पन्न हो गई है। 

पूर्वांचल विश्वविद्यालय, विराटनगर (नेपाल) के  कुलपति डाॅ. घनश्याम लाल दास ने कहा कि भारत और नेपाल दोनों विकासशील देश हैं। दोनों ही देश प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हैं। दोनों को विकास की दौड़ में आगे ले जाने के लिए प्राकृतिक आपदाओं से बचाव जरूरी है।ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. अमरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि बिहार ज्ञान की भूमि है। यहाँ के लोग तकनीकी का समुचित सदुपयोग करें, तो प्राकृतिक आपदाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

दोष तकनीकी का नहीं, बल्कि उसके उपयोगकर्ता का है। मुख्य वक्ता डाॅ. जी. एस. राॅय ने कहा कि प्राकृतिक आपदा एक वैश्विक समस्या है। इन आपदाओं का जीवन के सभी क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है और इससे हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी कुप्रभावित होता है। इसके कारण भय, चिंता, अवसाद, अनिंद्रा, स्मृतिलोप आदि समस्याएँ बढ़ जाती हैं।प्रति कुलपति डॉ. फारूक अली ने कहा कि कुसहा से केदारनाथ एवं केरल तक की सभी प्राकृतिक आपदाएँ मानवजनित हैं। ये हमारे अविवेकपूर्ण क्रिया-कलापों के कारण घटित हुई हैं। इसके पूर्व अतिथियों का अंगवस्त्रम् एवं पुष्प देकर सम्मानित किया गया।

अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कुलानुशासक डाॅ. अशोक कुमार ने विश्वविद्यालय का परिचय प्रस्तुत किया। अध्यक्षता डाॅ. रामचंद्र प्रसाद मंडल, संचालन पृथ्वीराज यदुवंशी और धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. एच. एल. एस. जौहरी ने किया।इस अवसर पर नेपाल के डाॅ. डी. के. टागुना, डाॅ. बिजू कुमार थपलियाल, डाॅ. राजेश कुमार, पूर्व प्रति कुलपति डाॅ. के. के. मंडल, पूर्व कुलसचिव डाॅ. शचीन्द्र महतो, कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार, पीआरओ डाॅ. सुधांशु शेखर, डाॅ. अरूण कुमार मिश्र, डाॅ. उर्मिला मिश्रा, डाॅ. जनार्दन प्रसाद यादव, डाॅ. कपिलदेव प्रसाद यादव, डाॅ. आर. के. पी. रमण, डाॅ. कैलाश प्रसाद यादव, डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, डाॅ. रीता सिंह आदि उपस्थित थे।