बैंक हड़ताल के समर्थन में ऐक्टू व माले ने निकाला एकजुटता मार्च

मुजफ्फरपुर/ ब्रह्मानन्द ठाकुर : निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय बैंक हड़ताल के समर्थन में ऑल इंडिया सेन्ट्रल कॉउन्सिल ऑफ ट्रेडयूनिन्स(ऐक्टू) व भाकपा-माले ने एकजुटता मार्च निकाला। इस दौरान बैंक, रेल व सरकारी संसाधनों का निजीकरण बंद करो,मजदूर विरोधी 4 श्रम कोडों को रद्द करो, 12घंटे कार्य दिवस नहीं चलेगा, किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लो, देश पर अंबानी-अडानी का कंपनी राज थोपना बंद करो, छंटनी पर रोक लगाओ, बेरोजगारों को रोजगार दो, महंगाई पर रोक लगाओ जैसे नारे लगाए गए।


मार्च में ऐक्टू के जिला संयोजक मनोज यादव, माले जिला सचिव कृष्ण मोहन, रसोईया संघ के जिला सचिव परशुराम पाठक, निर्माण मजदूर यूनियन के जिला अध्यक्ष अमोद पासवान, सुरेश राम, संतलाल पासवान, खेत मजदूर सभा के जिला सचिव शत्रुघ्न सहनी, अजय कुमार साह, उमेश भारती, मो, नैमुद्दीन सहित अन्य शामिल थे।

इस दौरान माले व ऐक्टू नेताओं ने कहा कि बैंकों की हड़ताल का समर्थन करते हुए ट्रेडयूनियनों और किसान संगठनों ने देश स्तर पर 15मार्च को निजीकरण विरोधी दिवस के रूप में घोषणा की थी। मोदी सरकार तेजी से सबकुछ देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करने में जुटी है।

सारे नये श्रमिक कानून और नीतियां मजदूरों, कर्मचारियों व किसानों के खिलाफ कॉरपोरेट घरानों के फायदे के लिए बनाई जा रही है। ये सब अंग्रेजी राज की तरह आमलोगों को कॉरपोरेट का गुलाम बनाने की साजिश है। देश पर थोपे जा रहे कंपनीराज के कारण महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है।

लोकतंत्र और संविधान खतरे में है। लेकिन निजीकरण और कंपनीराज के खिलाफ देश के किसान, मजदूर, कर्मचारी और छात्र-नौजवान तथा सभी वाम-लोकतांत्रिक शक्तियों की एकजुटता भी तेजी से बढ़ी है। निजीकरण और कम्पनी राज के खिलाफ चौतरफा आंदोलन और तेज होगा।