बिना संस्कृत के भारतीय संस्कृति का रक्षण असंभव: डॉ. भारती मेहता

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मुजफ्फरपुर/प्रतिनिधि: पूरे बिहार में विभिन्न प्रकार के विद्यालयों को मिलाकर दस हजार से अधिक संस्कृत शिक्षक हैं,लेकिन वे सभी संभाषण में दक्ष नहीं है,जबकि भाषा के प्रारंभिक ज्ञान के लिए संभाषण में दक्षता अनिवार्य है।संस्कृत शिक्षकों द्वारा संस्कृत ना बोल पाना दुर्भाग्य का विषय है। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड अब इसके लिए कार्य करेगा। उक्त बातें बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष डॉक्टर भारती मेहता ने कहा।वे भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में संस्कृत भारती द्वारा आयोजित दो दिवसीय बिहार स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रही थी।

उन्होंने बिहार में संस्कृत को एक बार फिर प्रतिष्ठा दिलाने के लिए सबको मिलजुल कर काम करने का संकल्प दिलाने के साथ कहा कि संस्कृत विद्यालयों का वातावरण संस्कृतमय बने इसके लिए संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं का सहयोग जरूरी है। इसके लिए संस्कृत विद्यालय के परीक्षा परिणाम को नियमित किया जा रहा है। उनहोंने कहा कि 17 साल बाद आज इस तरह के सम्मेलन में पहुंच कर अपना अध्ययन काल याद आ गया। कार्यक्रम में संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री शिरीष देव पुजारी भी उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि भारत को यदि विश्व में भारत की भूमिका संस्कृत भाषा है जिसके प्रति विश्व का नजरिया बदला है। विश्व के कई विश्वविद्यालयों में संस्कृत की मांग तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है जिसे अब वैज्ञानिक भी स्वीकार कर रहे हैं। संस्कृत तेजी से रोजगार की भाषा बनती जा रही है, इसलिए आने वाला समय संस्कृत का है। इस दौरान क्षेत्र मंत्री श्रीप्रकाश पांडे ने कहा कि पूरे बिहार में सैकड़ों संस्कृत शिक्षक हैं लेकिन संस्कृत को जन- जन की भाषा कैसे बनाया जाए इस पर विचार करने के लिए वैसे शिक्षकों को इस सम्मेलन में बुलाया गया है। उन्होंने संस्कृत को संस्कृत में ही पढ़ाने की बात पर जोर दिया।

कार्यक्रम संयोजक और उत्तर बिहार के प्रांत मंत्री डॉ रमेश झा ने बताया कि संस्कृत भारती के कार्यकर्ता संस्कृत को जनभाषा बनाने के कार्य में दिन रात लगे रहते हैं।बिहार के ऐसे कार्यकर्ताओं को एक बार फिर इस कार्य के लिये जागृत करने और आगामी योजना पर विचार करने के उद्देश्य से यह दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया है।इस मौके पर भारती बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ दीप्तांशु भास्कर, दक्षिण बिहार के प्रांत मंत्री डॉ रामेश्वर धारी ,डॉ अभिषेक द्विवेदी,चन्द्रशील कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ मृत्युंजय राकेश,देवनिरंजन दीक्षित, डॉ विभाकर दूबे,एचओडी डॉ पूनम कुमारी सिन्हा समेत सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।