नालंदा: आशा नए सिरे से करेंगी संभावित फाइलेरिया रोगियों की लाइनलिस्टिंग

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-फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में सामुदायिक स्तर पर लोगों का जागरूक होना जरूरी: डॉ. रामकुमार प्रसाद

Biharsharif/Avinash pandey: फाइलेरिया जिसे हाथीपांव रोग के नाम से भी जाना जाता है, एक दर्दनाक रोग है। जिसके कारण शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है| यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है| आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है| फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है|

आशा करेंगी संभावित फ़ाइलेरिया रोगियों की लाइनलिस्टिंग
नालंदा जिले में आशा कार्यकर्ता संभावित फ़ाइलेरिया के मरीजों की लाइनलिस्टिंग करेंगी| इस संदर्भ में जिला वेक्टर बोर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राम कुमार प्रसाद ने जिले के सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं| जारी पत्र में बताया गया है कि अपर निदेशक- सह- राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, फ़ाइलेरिया द्वारा जारी निर्देशानुसार वर्ष 2023-24 में फ़ाइलेरिया के मरीजों का आशा के माध्यम से नए सिरे से सर्वे कर लाइन लिस्ट एक्सेल शीट में भरकर जिला कार्यालय में प्रेषित किया जाना है| इसके उपरांत इस शीट को राज्य फ़ाइलेरिया कार्यालय में प्रेषित किया जायेगा|

लोगों में है जागरूकता का अभाव
फाइलेरिया बीमारी को लेकर लोगों में अभी भी जागरूकता का अभाव देखा जा रहा है। पैरों में हो रहे बार-बार सूजन को कुछ लोग अभी भी नजरअंदाज कर रहे हैं। बिना डॉक्टर को दिखाए और जांच कराएं मेडिकल स्टोर से दवा लेकर अस्थाई समाधान पा रहे हैं। वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया को लेकर लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे और समय-समय पर एमडीए (सर्व जन दवा सेवन) अभियान के माध्यम से लोगों को फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दवा भी खिलाई जा रही है। परंतु अभी भी कहीं ना कहीं लोगों में जागरूकता का अभाव दिखाई दे रहा है।

अभियान में लें बढ़ चढ़ कर हिस्सा
डॉ प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2030 तक फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। जिला स्वास्थ्य समिति इस उन्मूलन अभियान में जिले को भी फाइलेरिया मुक्त करने में प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में सामुदायिक स्तर पर लोगों का जागरूक होना जरूरी है। फाइलेरिया कभी ना ठीक होने वाली बीमारी है। यदि एक बार हो गया तो उसे ठीक नहीं किया सकता है। इसलिए जरूरी है कि समय पर इसकी पहचान करके इस बीमारी को रोका जा सके।

उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से बचाव और रोकथाम के लिए साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा अल्बेंडाजोल और डीईसी का सेवन कराया जाता है। ताकि लोगों में मौजूद फैलेरिया के परजीवी समाप्त हो जाए। उन्होंने लोगो से अपील की है कि फाइलेरिया रोकथाम के लिए जो भी अभियान चलाए जा रहे हैं उसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें ताकि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।