Nawada : 3 लाख 63 हजार गोवंश को लगेंगे एंटी लंपी के टीके

0
58

Rabindra Nath Bhaiya: पशुओं में फैल रही लंपी स्किन डिजीज वायरस से बचाव के लिए में लिए सघन टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान लंपी की रोक-थाम के लिए जिले में गोवंश (गाय, बैल, बछड़े) का टीकाकरण होगा। जिले में 3 लाख 73 हजार मवेशियों को लांपी के टीके लगाए जाएंगे। औपचारिक रूप से अभियान का उद्घाटन किया गया। जिले के कई प्रखंडों में पर्याप्त मात्रा में डोज मुहैया नहीं होने के कारण अभियान शुरू नहीं हो पाया। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ ब्रजेश कुमार ने बताया कि देश में बड़े पैमाने पर पशुधन को क्षति पहुंचाने वाले लंपी वायरस की रोकथाम के लिए सघन टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। जिले में वैक्सिनेशन अभियान की शुरूआत हो चुकी है। हालांकि कुछ प्रखंडों में यह अभियान आज से शुरू होगा। जिला पशुपालन अधिकारी ने लंपी टीकाकरण की मॉनिटरिंग के लिए सभी प्रखंडों के लिए नोडल पदाधिकारी बनाए हैं। लंपी का टीकाकरण करने के लिए जिले में 204 वैक्सीनेटर्स लगाए गए हैं। सभी टीका कर्मियों को पंचायत आवंटित कर दिए गए हैं।

क्या है लंपी स्किन डिजीज:-
पशु चिकित्सक बताते हैं कि लंपी स्किन डिजीज पशुओं को होने वाली एक वायरल बीमारी है। ये पॉक्स वायरस से मवेशियों में मच्छर और मक्खी के जरिए एक से दूसरे में फैलती है। इस बीमारी के लक्षणों में पशु के शरीर पर छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं, शरीर पर जख्म नजर आने लगते हैं। पशु खाना कम कर देता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। बीमारी की शुरूआत में पशु को दो से तीन दिन तक हल्का बुखार रहता है। उन्होंने अपील की है कि पशुपालक बीमार पशुओं का सरकारी चिकित्सालय में ही उपचार कराएं।

डोर टू डोर जाएंगे टीकाकर्मी:-
अभियान के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहे सभी गायों, बैलों, बाछी और बछड़े को लंपी का टीका लगाया जाएगा। इसके लिए पशुपालन विभाग की ओर से पर्याप्त मात्रा में टीका दवा, निडील और सीरिंज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लंपी से पशुपालकों को बड़ी क्षति पहुंचती है। इसलिए विभाग इस समस्या के प्रति काफी संजिदा है। मवेशियों को लंपी से बचाव के लिए शत प्रतिशत टीका लगाया जाना है। वेक्सिनेशन अभियान के लिए एक चिकित्सक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

कई पशुओं की हो चुकी है मौत:-
बता दें कि लंपी वायरस ने साल 2022 में देशभर में बड़ी तबाही मचाई थी और लाखों पशुओं की मौत हो गई जिले में भी पिछले कुछ माह में बड़ी संख्या में मवेशी लंपी से पीड़ित हुए। सबसे पहले हिसुआ के दोना पंचायत के मुड़कटा गांव में एक लंपी से पीड़ित मवेशी मिले थे। इस दौरान मवेशियों में लंपी रोग का जबरदस्त और भयानक रूप देखने को मिला। इस रोग का कोई कारगर ईलाज भी नहीं है। लंपी रोग होने के बाद पशु पालक निःसहाय दिखते हैं। पशु चिकित्सक भी कुछ खास नहीं कर पाते हैं। ऐसे में टीकारण ही एक मात्र बचाव है।