गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिलाओं का उचित प्रबंधन जरूरी: डॉ. मधु सिन्हा

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नवादा (पंकज कुमार सिन्हा): बदलते परिवेश में मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  विशेषकर गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिलाएं अब शहरों के साथ गांव में भी पाए जाने लगी है।  इसलिए सरकार गैर संचारी रोग कार्यक्रम के तहत ऐसे मरीजों को लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है।  इसके उचित प्रबंधन एवं उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला स्वास्थ्य इकाई पर विशेष सुविधा भी उपलब्ध कराई है।  सदर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मधु सिन्हा ने बताया कि भारत में गर्भावस्था में मधुमेह की दर लगभग 10 से 14 प्रतिशत है।

गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में यदि समय से उपचार नहीं हो पाता है, तब आगे चलकर प्रसूता एवं गर्भस्थ शिशु में विभिन्न जटिलताएं हो सकती है। दोनों टाइप की मधुमेह से पीड़ित हो सकते हैं।  इसमें गर्भवती में इन्फेक्शन प्रसव अवधि में बढ़ोतरी,  जटिलता पूर्व प्रसव के बाद,  एवं प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताएं भी हो सकती है।  जिससे प्रसूता की जान का खतरा बना सकता है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में शिशु को भी समस्या हो सकती है।  इससे गर्भस्थ शिशु की मृत्यु , मृत शिशु का जन्म, बर्थ डिफेक्ट बर्थ इंजुरी एवं नवजात शिशु में ग्लूकोज की कमी के साथ पहले 3 महीने में अचानक गर्भपात की समस्या 30 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है।  डॉ मधु सिन्हा ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को प्रथम प्रसव पूर्व जांच के दौरान मधुमेह की जांच जरूर करानी चाहिए। 

जिसके लिए जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला अस्पताल में इसकी पूर्ण व्यवस्था कराई गई है।  गर्भधारण से पूर्व भी मधुमेह की जांच जरूरी है।  साथ ही प्रत्येक महीने की 9 तारीख को समस्त जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत अन्य जांचों के साथ गर्भवती महिलाओं में मधुमेह की भी निशुल्क जांच की जाती है । इसमे गर्भवती महिला को 75 मिलीग्राम का एक पैकेट,  300 मिलीग्राम पानी में घोलकर पिलाने के लिए 2 घंटे उपरांत प्लाज्मा ग्लूकोज की जांच की जाती है।  यदि जांच पॉजिटिव होता है तो दिशा निर्देशों के अनुसार उपचार की दिशा में कार्य किया जाता है। 

इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ मधु सिन्हा ने कहा कि यदि महिला गर्भधारण पूर्व मधुमेह से ग्रसित है, तो इसका एक मात्र इलाज इंसुलिन है । जबकि गर्भधारण के बाद यदि मधुमेह का प्रभाव पाया जाता है तो,  साधारण इलाज से इसे कंट्रोल किया जा सकता है । इसके उपचार के लिए सरकार द्वारा तीन व्यवस्थाएं की गई।  एवं पोषण संबंधित दवाई द्वारा एवं तीसरा इंसुलिन इंजेक्शन के द्वारा गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिला को पोषण संबंधी जानकारी दी जानी अत्यावश्यक है।

शिशु के विकास के लिए पोषण आहार क्या है, कितनी होनी चाहिए एवं में सामान्य स्तर को बनाए रखने के लिए कितना और कौन सा भोजन लेना है।  यह भी जानकारी होना चाहिए । जिन महिलाओं का पोषण संबंधित उपचार से नियंत्रित नहीं होता है , उन्हें दवा दी जाती है।  साथ ही जब दवा अनियंत्रित होता है , तब चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है।