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संत रविदास ने बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने का दिया संदेश: ललन भंते

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नवादा/(पंकज कुमार सिन्हा): संत रविदास ने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने का संदेश दिया है। संत रविदास का जन्म वाराणसी के पास एक छोटे से गांव में लगभग 1450ई. में हुई थी। उनकी माता का नाम कलसा देवी और पिता का नाम संतोख दास जी उर्फ संत रविदास जी था। उक्त बातें नरहट के चांदनी चौक स्थित रविदास जयंती के मौके पर भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमलेश राणा ने कही। इस मौके पर उन्होनें सभा को संबोधित करते हुए कहा हमें अपने गुरु के जीवन से जुड़ी महान घटनाओं को याद कर उनसे प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। संत रविदास के जीवन के कई ऐसे प्रेरक प्रसंग है जिनसे हम सुखी जीवन के सूत्र सीख सकते हैं। आज का दिन हमारे लिए वार्षिक उत्सव की तरह है। मौके पर सैकड़ों लोग उपस्थित हुए। जयंती के मौके पर यहां विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

भीम आर्मी के सदस्यों एवं उनके अनुयायियों द्वारा संत रविदास जी के दोहे गाए और भजन-किर्तन का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिसुआ भीम आर्मी अध्यक्ष धर्मेन्द्र राजवंशी ने किया जबकि संचालन नरहट प्रखंड अध्यक्ष रंजीत चौधरी ने किया। कार्यक्रम में उनके जीवनी पर प्रकाश डालते हुए ने पूर्व जिलाध्यक्ष चंदन कुमार चौधरी ने कहा रविदास जी अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे। एक दिन खेलने के बाद अगले दिन वो साथी नहीं आता है तो रविदास जी उसे ढूंढ़ने चले जाते लेकिन उन्हें पता चलता है कि उसकी मृत्यु हो गई। ये देखकर रविदास जी बहुत दुखी होते हैं और अपने मित्र को बोलते हैं कि उठो ये समय सोने का नहीं है। मेरे साथ खेलो।

इतना सुनकर उनका मृत साथी खड़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संत रविदास जी को बचपन से ही आलौकिक शक्तियां प्राप्त थीं। मौके पर सुबोध पासवान, नारदीगंज प्रखंड अध्यक्ष अनुपम कुमार दास, धर्मेन्द्र राजवंशी, रविशंकर भारती, प्रदीप राजवंशी, सुनील चौधरी, जितेन्द्र कुमार चौधरी, सुनील कुमार रविदास, राजेश दास, चंदन रविदास, विनोद दास, सुरेश मांझी, धर्मेन्द्र कुमार चौधरी, बालेश्वर रविदास एवं अन्य लोगों ने अपने विचार रखे।

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