न राबड़ी को बंगला खाली करना होगा,न जीतन राम मांझी को नया आशियाना तलाशना होगा!

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हेमंत कुमार/पटना: न राबड़ी देवी को बंगला खाली करना होगा,न जीतन राम मांझी को नया आशियाना तलाशना होगा! पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिली सरकारी सुविधाएं वापस लेने के पटना हाइकोर्ट के आदेश का सीधा असर पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद और डॉ जगन्नाथ मिश्र पर पड़ेगा।ये दोनों फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

राबड़ी देवी बिहार विधान परिषद में राजद विधायक दल की नेता हैं।उन्हें कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा प्राप्त है।उन्हें मिला हुआ बंगला भी मंत्रियों की श्रेणी का ही है।लिहाजा उन्हें 10 , सर्कुलर रोड वाला बंगला नहीं छोड़ना पड़ेगा। हां, अगर सरकार पुराने बंगले का आवंटन रद्द कर उन्हें नया बंगला आवंटित करती है , तो समस्या आ सकती है। लेकिन ऐन चुनाव से पहले सरकार ऐसा कोई आत्मघाती कदम उठायेगी, ऐसा लगता नहीं है!

जीतन राम मांझी को आवंटित आवास 12, M स्ट्रैंड रोड उनसे वापस नहीं लिया जायेगा। मांझी पिछले पैतीस सालों से विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री हैं।उनका सरकारी सुरक्षा घेरा भी बना रह सकता है।क्योंकि उन्हें केंद्र सरकार से विशेष सुरक्षा मिली हुई है! मांझी को सरकारी खर्चे पर मिले छह स्टाफ की सुविधा त्यागनी होगी।

सतीश प्रसाद और डॉ जगन्नाथ मिश्र को मिली सरकारी सुरक्षा, सरकारी वाहन, सरकारी आवास और सरकार के खर्चे पर छह स्टाफ रखने की सुविधाएं तत्काल प्रभाव से वापस ले ली जायेंगी। पचास साल पहले पांच दिनों ( 28 जनवरी , 1968 से 1 फरवरी, 1968 ) के लिए बिहार के मुख्यमंत्री बने सतीश प्रसाद को 33A,हार्डिंग रोड का बंगला मिला हुआ है।प्रसाद कंकड़बाग स्थित अपने निजी आवास में रहते हैं। सरकारी बंगले में उनके निजी स्टाफ रहते हैं।सतीश प्रसाद पिछड़ी जाति (कोयरी) से बिहार के पहले मुख्यमंत्री थे।

तीन दफे बिहार के मुख्यमंत्री रहे डॉ जगन्नाथ मिश्र को आवंटित सरकारी बंगला भी उनके स्टाफ का आवास बना हुआ है। डॉ मिश्र अपने निजी आवास में रहते हैं। हाइकोर्ट के आदेश का सीधा असर डॉ मिश्र और सतीश प्रसाद को मिली सरकारी सुविधाओं पर पड़ेगा।दोनों से सरकारी सुरक्षा,आवास,वाहन और स्टाफ वापस ले लिए जायेंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से मिला 7, सर्कुलर रोड का बंगला हाइकोर्ट का आदेश आने के बाद त्याग दिया था।कोर्ट का आदेश आते ही 7, सर्कुलर रोड का बंगला कुछ शर्तों के साथ मुख्य सचिव को आवंटित कर दिया गया था। कुछ दिन वहां रहने के बाद नीतीश अपने आफिसल आवास 1, अण्णे मार्ग में शिफ्ट हो गये थे। नीतीश के पास मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के नाम से दो-दो बंगले पर पहले खूब सवाल उठे थे! साल 2017 के जुलाई में सरकार पलटने से पहले तक विपक्ष के नेता रहे सुशील कुमार मोदी नीतीश के बंगला प्रेम पर बहुत हमलावर रहते थे!