दुनिया में कोई पैदा नहीं हुआ जो आरक्षण खत्म कर सके- सुशील मोदी

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पटना/नियाज आलम: भाजपा महादलित प्रकोष्ठ द्वारा विद्यापति भवन में आयोजित ‘संत शिरोमणि गुरू रविदास जयंती समारोह’ को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जो लोग दुष्प्रचार करते हैं कि भाजपा आरक्षण खत्म कर देगी मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि कान खोलकर सुन लीजिए दुनियां में कोई पैदा नहीं हुआ जो एससी और एसटी का आरक्षण खत्म कर सके।

15 साल तक बिहार में कांग्रेस के साथ राज करने वालों की सरकार में लक्ष्मणपुर बाथे में 58, बथानी टोला में 21, हैबसपुर में 10, शंकरबीघा में 23, नारायणपुर में 22 दलित गाजर, मूली की तरह काटे गए। 2005 से एनडीए की सरकार में हमने एक भी ऐसा वाकया नहीं होने दिया। 23 साल तक बिहार में पंचायत चुनाव नहीं कराया गया और 2001 में एकल पदों पर एससी व एसटी को आरक्षण दिया बिना चुनाव करा लिया गया।

विश्वविद्यालयों में प्रध्यापकों की बहाली में सुप्रीम कोर्ट ने विभाग को इकाई मानकर नियुक्ति का आदेश दिया जिसका नरेंद्र मोदी सरकार ने विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है और फिलहाल बहाली पर पूर्णतया स्थगित कर दिया है।

अगर पुनर्विचार याचिका का फैसला पक्ष में नहीं आया तो सरकार अध्यादेश लाकर कानून बनाएगी। पिछड़े वर्ग के आयोग को संवैधानिक दर्जा तथा ऊंची जाति के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का काम नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया। यही है सबका साथ और सबका विकास।

बिहार सरकार यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले एससी व एसटी समाज के बच्चों को 1 लाख एवं बीपीएससी पास करने वाले को 50 हजार रूपये प्रदान कर रही है ताकि आइएएस और आइपीएस बनने के उनके सपने साकार हो सके।

इसके लिए कल्याण छात्रावास में रहने वाले छात्रों को एक हजार रुपये महीना के अलावा प्रति महीना 15 किलो अनाज दिया जा रहा है। बिहार सरकार एससी और एसटी समाज के युवकों को उद्योग लगाने हेतु 10 लाख रुपये प्रदान कर रही है जिसमें 5 लाख रुपया बिना ब्याज का अनुदान जिसे वापस नहीं करना है तथा 5 लाख रुपया ब्याज रहित कर्ज है।

एनडीए की सरकार समाज के सभी वर्गों की चिंता करती है। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की कुछ धाराओं को सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिय तो नरेंद्र मोदी की सरकार ने फिर से बहाल करने का काम किया। केन्द्र की नमो सरकार अब किसी को पैरवी पर नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर उन्हें ढूंढ कर पद्मश्री जैसे सम्मान देती है। इन्हीं में से भागीरथी देवी और मुसहर बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने वाले जे के सिन्हा जैसे लोग है।