पटना : मछुआरों ने उठाई एक रूपये के टोकन पर तालाबों की बंदोबस्ती करने की माँग

पटना/संजीव : बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ की सोमवार को आयोजित आम सभा में बिहार एवं झारखण्ड राज्य के कोने-कोने से आये मछुआरों ने राज्य सरकार से एक रूपये के टोकन राशि पर सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती करने की माँग उठाई । मछुआरों ने कहा कि एक रूपये टोकन पर तालाबों के बन्दोवस्ती होने से मछुआरों को बहुत बडी राहत मिल सकती हैं। साथ ही इससे विभागीय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।



सभा की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष सकलदेव सहनी ने की। आम सभा में आये अतिथियों का स्वागत संघ के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने किया। उन्होनें कहा कि संघ मछुआरों के हितों की रक्षा के लिये हर संभव प्रयास कर रहा हैं। उन्होने कहा कि राज्य में 70 हजार से अधिक तालाबों की बन्दोवस्ती मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रति वर्ष किया जाता हैं। इन तालाबों के लिये मछुआरों को करोड़ों रूपये सरकार को भुगतान करना पड़ता हैं।

इसके अलावा गरीब मछुआरो से तालाब बन्दोवस्ती के नाम पर बड़ी राशि मत्स्य अधिकारी वसूल लेते है। अगर सरकार एक रूपये के टोकन पर तालाबों की बन्दोवस्ती की जाए तो मछुआरों को आर्थिक शोषन से बचाया जा सकता है। मालुम हों कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी घोषणा वर्ष 2013 में ‘मछुआरा दिवस’ के अवसर पर एवं डा0 प्रेम कुमार तत्कालीन मत्स्य मंत्री ने संघ के गत् वार्षिक आम सभा की बैठक में की थी।

उन्होनें कहा कि राज्य के सभी तालाबों का जीर्णोंद्धार मत्स्यजीवी सहयोग समिति/संघ के माध्यम से जल-जीवन-हरियाली योजना अंर्तगत किया जाये एवं मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड निर्गत किया जाए। बैठक मेें निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी मछुआरों के समस्यओं के लिए नियमित बैठक की जाएगी, और संघ के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर मछुआरों से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालेगें।

श्री कश्यप ने कहा कि पैक्स की तरह मछुआरों की सहकारी समितियों के लिए भवन निर्माण, कार्यालय के लिए कम्प्यूटर आदि की व्यवस्था की जाए। जिन इलाकों में सुखाड़ की समस्या बनी हुई है उन इलाको के तालाबों की राजस्व माफ की जाए एवं पूर्व के बकाया कर्ज को माफ किया जाए। आगामी 10 जुलाई को ‘मछुआ दिवस’ को बड़े धूमधाम से करने की निर्णय लिया गया।

इसके अलावा सरकार नदियों की निःशुल्क शिकारमाही को समाप्त कर अब उसे मछुआ समितियों के साथ एक रूपये की टोकन राशि पर बंदोबस्त किया जाए।
आगे उन्होनें इस बात पर जोर दिया कि मछुआ समितियों में केवल मछुआरें ही रहें। उन्होंनंे कहा कि खुली डाक की परम्परा समाप्त कर एक रूपये टोकन पर सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती मछुआ समितियों के साथ की जाएगी।

काॅफ्फेड के प्रबंध निदेशक श्री ऋषिकेश कश्यप ने कहा कि राज्य में जिला मत्स्य पदाधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से तालाबों के राजस्व में वृद्धि कर दी गई है। इसे गरीब मछुआरों के सामने भूखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। एक तरफ प्रकृति के मार से मछुआरे परेशान है। तालाबों में पानी नही है। मछलियाॅं मर रही है, उन्हें बचाने में ही मछुआरों की बची राशि खर्च हो जा रही है ऐसे में मत्स्य पालन अधिकारियों द्वारा राजस्व में पाॅंच से छः गुणा वृद्धि जले पर नमक छिड़कने के समान है।

श्री कश्यप ने कहा कि मछुआ समाज एकजुट है और सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है बेशत्र्ते सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करते रहें। मंच संचालन श्री नरेश कुमार सहनी ने किया। इस अवसर पर संघ के निदेशक, राजकुमार केवट, श्रीमति पद्मजा प्रियदर्शी,, अजेन्द्र कुमार, प्रदीप कुमार सहनी, बजेन्द्रनाथ सिन्हा, जयशंकर मिडिया प्रभारी, अजय कुमार मंडल, मुन्ना चैधरी, लड्डु सहनी ने सभा को संबोधित किया।