मुख्यमंत्री ने समाधान यात्रा के क्रम में वैशाली जिले की जीविका दीदियों के साथ किया संवाद

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DESK : मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज समाधान यात्रा के क्रम में वैशाली जिले की जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। हाजीपुर के बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में जीविका दीदियों ने हिस्सा लिया। संवाद कार्यक्रम में जीविका समूह के माध्यम से उत्कृष्ट कार्य करने वाली 8 जीविका दीदियों ने अपने-अपने अनुभव साझा किये। श्रीमती सीता देवी, श्रीमती सरिता देवी, श्रीमती कुमारी कृष्णा सिन्हा, श्रीमती किरण देवी, श्रीमती कैंसर जहां, श्रीमती बबीता देवी, श्रीमती प्रतिमा कुमारी और श्रीमती ललिता देवी ने जीविका समूह से जुड़ने के बाद जीवन स्तर में हुए बदलाव को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान जीविका दीदी श्रीमती सीता देवी ने बताया कि मैं तमिलनाडु की रहने वाली हूं लेकिन मेरी यहां शादी हुई है। शादी के बाद मेरी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। जीविका से जुड़ने के बाद जीवन में काफी बदलाव आया। वर्ष 2014 में 10 हजार रुपये लोन लिया। मछली का बिजनेस शुरू किया। फिर दूसरा किस्त 25 हजार रुपये का लोन लिया। तीसरा किस्त 40 हजार रुपये का लोन लिया। मछली का मेरा अच्छा बिजनेस चल रहा है और 25 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह मेरी आमदनी हो रही है। नीतीश भईया को इसके लिए हम बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं।

जीविका दीदी श्रीमती सरिता देवी ने बताया कि मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि मैं इतने बड़े-बड़े लोगों के साथ बैठकर संवाद कर रही हूं। मेरे घर की हालत खराब थी। मेरे पति कोमा में हैं। जीविका दीदी से मिलने के बाद काफी लाभ हुआ। 10 हजार रुपये से सिलाई मशीन खरीदी फिर और तीन सिलाई मशीन खरीदी। सिलाई के लिए बड़ी दुकान खोली। मैं खिलौना और राखी भी बेचती हूं। जीविका से जुड़ने के बाद मेरे परिवार की आर्थिक हालत काफी सुधरी है। सतत् जीविकापार्जन योजना का मुझे काफी लाभ मिला है। मैं मुख्यमंत्री जी का इसके लिए आभार व्यक्त करती हूं। जीविका दीदी श्रीमती कुमारी कृष्णा सिन्हा ने बताया कि मेरे घर की आर्थिक स्थिति दयनीय थी। 10 हजार रुपये का लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई करने लगी दूसरे किस्त से 20 हजार रुपये मिला जिससे और मशीन खरीदी। मेरा सिलाई कार्य बेहतर ढंग से होने लगा। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का लाभ भी मिल रहा है। 100 और जीविका दीदियों को मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से जोड़ रहे हैं। हमारा अनुरोध है कि आपकी कृपा यूं ही बनी रहे। आपका साथ हमेशा मिलता रहे और हमलोग आगे बढ़ते रहें।

जीविका दीदी श्रीमती किरण देवी ने बताया कि मेरे पति पियक्कड़ थे। शराब पीने के बाद मेरे साथ जानवर जैसा व्यवहार करते थे। हम बहुत दुःखी रहते थे। जीने की इच्छा समाप्त हो चुकी थी। जीविका से जुड़ने के बाद एक सिलाई मशीन खरीदी और उससे 2 से 3 हजार रुपये कमाई होने लगी। शराबबंदी कानून लागू होने के बाद हमने पति को काफी समझाया लेकिन वो फिर भी नहीं माने तो मैंने पुलिस को फोन कर उन्हें जेल भिजवाया। जेल में उनसे मिली और कहा अगर आप कसम खाते हैं कि शराब फिर नहीं पीयेंगे तो आपको जेल से छुड़वाएंगे। उन्होंने कसम खायी की शराब नहीं पीयेंगे तो हमलोगों ने उन्हें फिर जेल से छुड़वाया। पति के जेल से आने के बाद हमलोगों ने लोन से एक भैंस खरीदी। उससे दूध, घी बेचकर अच्छी कमाई हो रही है। हमारे बच्चे अब ठीक ढंग से पढ़ रहे हैं। मेरे घर के बगल की एक 15 वर्ष की लड़की की शादी हो रही थी। हम जीविका दीदियों ने उसे समझाया और उसे शादी रोकनी पड़ी। हमारी बातों को समाज में आदर के साथ सभी लोग सुनते हैं। नीतीश भईया को इसके लिए बहुत धन्यवाद देते हैं। शुक्रिया अदा करते हैं कि आपके चलते हमलोगों की समाज में प्रतिष्ठा बढ़ी है।

जीविका दीदी श्रीमती कैंसर जहां ने बताया कि जीविका समूह से जुड़ने के बाद 10 हजार रुपये में सिलाई मशीन खरीदी। उसके बाद 20 हजार रुपये में और तीन सिलाई मशीन खरीदी। उससे अच्छी आमदनी होने लगी। हमलोग जीविका दीदियों ने कोरोना के दौरान मिलकर 1 लाख 45 हजार मास्क बनाया जिससे 83 हजार 700 रुपये का हमलोगों को लाभ हुआ। हमलोगों ने आपस में बांटकर उससे आगे का कारोबार किया। जीविका में रहकर हम अपना काम कर रहे हैं और हमारा परिवार आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री जी को इसके लिए शुक्रिया अदा करते हैं। जीविका दीदी श्रीमती बबीता देवी ने बताया कि मेरे पति पहले ताड़ी बेचते थे लेकिन शराबबंदी के बाद ताड़ी बंद हो गया और पति बेरोजगार हो गए। सतत् जीविकोपार्जन योजना के माध्यम से पहले 10 हजार रुपया मिला जिससे दुकान खुलवाए फिर 20 हजार रुपया मिला जिससे मसाला की खरीदारी कर उसका कारोबार किए।

और राशि से हम अपना अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं। बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बेटा-बेटी को ठीक से पढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री सतत् जीविकोपार्जन योजना के लिए धन्यवाद देते हैं और आग्रह करते हैं कि इसको ऐसे ही चलाते रहें ताकि हम सभी को रोजगार मिलता रहे। जीविका दीदी श्रीमती प्रतिमा कुमारी ने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद घर से बाहर निकलने का मौका मिला। कई चीजों को समझने का मौका मिला। हमने मत्स्य पालन शुरू किया। हमारे पोखर से 2 क्विंटल तक की मछली निकाली जाती है। हमारी इससे अच्छी आमदनी हो रही है और हमारा परिवार अच्छे रह रहा है। हम मुख्यमंत्री को इसके लिए धन्यवाद देते हैं।जीविका दीदी ललिता देवी ने बताया कि वर्ष 2014 में मैं जीविका समूह से जुड़ी थी जिससे मुझे काफी साहस और हौसला मिला। हैदराबाद में एग्रीकल्चर की ट्रेनिंग भी की है। 50 हजार रुपये का लोन लेकर मशरूम की खेती कर रही हूं। बच्चे और बच्चियों को अच्छे से पढ़ा रही हूं। मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करती हूं और सोचती हूं कि ऐसा दिन आएगा कि जीविका दीदी के बाल-बच्चे भी कलेक्टर बनेंगे।

संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान यात्रा के दौरान जीविका दीदियों के साथ मिलने और सुनने का मौका मिला है। मुझे इसके लिए बहुत खुशी हो रही है। हमारा उद्देश्य है कि सभी जगह घूमकर देखें, जो योजनाएं चलाई जा रही हैं उसका लाभ लोगों को कितना मिल रहा है और क्या किए जाने की जरूरत है। लोगों की क्या समस्याएं हैं, उसको जानने निकले हैं और उसके समाधान के लिए अधिकारियों को कह रहे हैं। हमने वर्ष 2006 में जीविका समूह का गठन किया। बाहर से कर्ज लिया और स्वयं सहायता समूह का नामकरण ‘जीविका’ किया। उस समय केंद्र सरकार के मंत्री ने आकर जीविका समूह के कामों को देखा और पूरे देश में इसका नामकरण ‘आजीविका’ किया यानी जीविका पूरे देश में आ जाए। उन्होंने कहा कि जीविका समूह से एक करोड़ 30 लाख के लगभग महिलायें जुड़ गई हैं। 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ है। आप सब भूलिएगा नहीं ‘जीविका’ बिहार की देन है। जीविका दीदियों की ट्रेनिंग का इंतजाम कराया गया। अभी संवाद के दौरान जीविका दीदियों ने बताया कि उन्हें इससे कितना फायदा हो रहा है। पहले महिलाएं बोल नहीं पाती थीं और अब कितने अच्छे ढंग से आगे बढ़कर अपनी बातें रख रही हैं और परिवार को भी आगे बढ़ा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 के जुलाई महीने में जीविका समूह की एक बैठक में महिलाओं की मांग पर ही शराबबंदी लागू की गई। जहरीली शराब के कारण कहीं कोई घटना घटित हो जाती है तो कुछ लोग अनाप-शनाप बोलते रहते हैं। आप सभी गड़बड़ करने वाले लोगों को समझायें शराब बुरी चीज है इसका सेवन न करें। सतत् जीविकापार्जन योजना के तहत पहले 60 हजार रुपये की मदद की जा रही थी लेकिन अब हमलोगों ने इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक कर दिया है। अगर और जरूरत होगी तो लोगों को सहयोग किया जाएगा। अभी जीविका दीदियों ने बताया है कि शराबबंदी के बाद घर की स्थिति बेहतर हुई है। पैसे की बचत होने से जरूरी सामान घर में खरीदा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने महिलाओं के लिए काफी काम किया है। पंचायती राज संस्थानों एवं नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षित की गई है। पुलिसबल में बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती हो रही है। बिहार में जितनी महिलाएं पुलिस में हैं उतनी बड़े-बड़े राज्यों में भी नहीं हैं। बच्चियों को पढ़ाने के लिए पोशाक योजना, साइकिल योजना शुरू की गई। बिहार में इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज में नामांकन हेतु एक तिहाई सीट आरक्षित की गई है। दहेज प्रथा नहीं होनी चाहिये। लड़के वाले को दहेज लेने का कोई औचित्य नहीं है, इसके लिये कानून बना हुआ है। समाज में लड़कियों और महिलाओं का काफी महत्व है। आप सभी दहेज प्रथा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाते रहिये। दहेज का लेन-देन करने वालों की शादी में शामिल न हों। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की उम्र में लड़की का जबकि 21 वर्ष की उम्र में लड़के की शादी होनी चाहिये। आप सभी अपने काम के साथ-साथ बाल विवाह के विरुद्ध अभियान भी चलाते रहिये। उन्होंने कहा कि एक सर्वे में यह बात सामने आई कि पति-पत्नी में यदि पत्नी मैट्रिक पास तो देश में औसत प्रजनन दर 2 है और बिहार का भी 2 है। यदि पत्नी इंटर पास है तो देश का औसत प्रजनन दर 1.7 और बिहार का 1.6 है।

पहले बिहार का औसत प्रजनन दर 4.3 था अब घटकर 2.9 पर पहुंच गया है। हमलोगों का लक्ष्य इसे 2 पर लाने का है। सरकारी विद्यालयों में ठीक ढंग से पढ़ाई हो, शिक्षक उपस्थित रहें, इस पर आप सभी नजर रखिये। यदि शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं तो आप सभी जीविका दीदियां उसकी रिपोर्ट करें। अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों को आपकी रिपोर्ट पर डिसमिस भी किया जा सकता है। हमलोग तनख्वाह बढ़ा रहे हैं तो शिक्षकों को भी पढ़ाने पर ध्यान देना चाहिये। सरकारी स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति को देखने जब जीविका दीदियां जायें तो उन पर कोई रुकावट नहीं होनी चाहिये। आप सभी अपने बच्चों को पढ़ायें। उन्होंने कहा कि लड़कियां पढ़ेंगी तो प्रजनन दर घटेगा और 15-20 वर्षों में आबादी स्थिर हो जाएगी। परिवार का प्रजनन दर जब नियंत्रित हो जायेगा तो सबका जीवन अच्छे ढंग से गुजरेगा। हमें पूरा भरोसा है कि आपके प्रयास और मेहनत से समाज में सुधार होगा, बच्चे शिक्षित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से जाति आधारित गणना की शुरुआत हुई है। इसमें न सिर्फ जाति की गणना होगी बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति की भी गणना होगी। आप सभी जीविका दीदी लोगों को इसमें सही जानकारी देने के लिए प्रेरित करें जाति आधारित गणना हो जाएगी तो सभी लोगों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और उसके आधार पर उनके लिए विकास के कार्य किए जाएंगे जाति आधारित गणना की रिपोर्ट हमलोग केंद्र सरकार को भी भेज देंगे ताकि पिछड़े हुए राज्य को आगे बढ़ाने में मदद करें। हमलोग आपलोगों को बढ़ाना चाहते हैं। बिहार की महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं। महिलाएं आगे बढ़ेंगी तो परिवार आगे बढ़ेगा। परिवार आगे बढ़ेगा तो राज्य और देश आगे बढ़ेगा।

इस अवसर पर बिहार विधान परिषद् के सभापति श्री देवेश चंद्र ठाकुर, उपमुख्यमंत्री श्री तेजस्वी यादव, वित्त, वाणिज्य कर एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान, लघु जल संसाधन मंत्री श्री जयंत राज, विधायक श्री सिद्धार्थ पटेल, विधायक श्री मुकेश रौशन, विधायक श्री संजय सिंह, विधायक श्रीमती प्रतिमा देवी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक श्री आर०एस० भट्ठी, विकास आयुक्त श्री विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, आयुक्त तिरहुत प्रमंडल श्री गोपाल मीणा, पुलिस उपमहानिरीक्षक तिरहुत प्रक्षेत्र श्री पंकज कुमार सिन्हा, जिलाधिकारी वैशाली श्री यशपाल मीणा, पुलिस अधीक्षक वैशाली, श्री मनीष सहित अन्य वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे। वैशाली जिले की जीविका दीदियां भी उपस्थित थीं।