शिक्षा की नीति तो ठीक बनती है किंतु उसका क्रियान्वयन करने वालों की नीयत ठीक नहीं रहती : प्रो रमाशंकर आर्य

0
80

शिक्षाविद प्रो विनय कुमार कंठ की स्मृति में शिक्षा का अधिकार कानून और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-22 पर विमर्श!

Patna, State Desk : हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था हमेशा से समाज की व्यवस्था से प्रभावित रही है! नीति तो ठीक बनती है किंतु उनके क्रियान्वयन करने वालों की नीयत ठीक नहीं रहती, बात चाहे अंग्रेजों द्वारा 1813 में शुरू की गई सभी के लिए पांचवी कक्षा तक के अनिवार्य शिक्षा का हो अथवा हाल के दिनों में दी जा रही शिक्षा, हमेशा से सामाजिक रूप से हाशिए पर के लोग शिक्षा से वंचित किए जाते रहे। उक्त बातें वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोo आरoएसo आर्या ने वॉलंटरी फोरम फॉर एजुकेशन द्वारा शिक्षा का अधिकार कानून और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहीं! यह कार्यक्रम जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक संस्थान पटना के सभागार में आयोजित किया गया।

वक्ताओं ने नयी शिक्षा नीति को शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे में रख कर देखने पर विमर्श किया! प्रोo विनय कुमार कंठ स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यक्रम का विषय प्रवेश करते हुए अभय पांडे ने नई शिक्षा नीति के मसौदे एवं उसकी विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की, उन्होंने सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा पर आंकड़ो के साथ अपनी बातें रखी! प्राच्य प्रभा के संपादक विजय कुमार सिंह ने शिक्षकों के बीच वेतन विसंगतियों की बातें कही, जबकि रविंद्र नाथ राय ने नई शिक्षा नीति को भागवा शिक्षा की संज्ञा देते हुए कहा कि अभी सरकारी विद्यालयों में सिर्फ नामांकन हो रहा है, पढ़ाई नहीं!

जयप्रकाश विश्वविद्यालय के प्रोo सतीश पटेल ने विद्यालय शिक्षको और महाविद्यालय शिक्षकों के वेतन में भारी विसंगतियों को पाटने की बात कही! बिहार विकलांग अधिकार मंच के राज्य सचिव राकेश कुमार ने दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई में हो रही उपेक्षा पर विस्तार से चर्चा की! इसके पूर्व वॉलंटरी फोरम फॉर एजुकेशन के इंo संजीव कुमार ने प्रोo विनय कुमार कंठ के कृतित्व और व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की!

कार्यक्रम को एक्शन एड के पंकज स्वेताभ, सेव द चिल्ड्रन की गजाला शाहीन, एआइएसए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमलेश शर्मा, शिक्षिका चित्रलेखा, जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक नरेंद्र पाठक, कवी सुमंत शरण, विजय कुमार सिन्हा, पूर्व शिक्षक रविंद्र प्रसाद सिन्हा,पत्रकार पुष्पराज समेत कई लोगों ने संबोधित किया! कार्यक्रम का संचालन संजीव कुमार और धन्यवाद ज्ञापन अनंत ने किया।