32.1 C
Delhi
Homeबिहारपटनायही बसंत और चैत्र के महीने में होती है पित की वृद्धि...

यही बसंत और चैत्र के महीने में होती है पित की वृद्धि : डॉ अखौरी प्रमोद प्रकाश

- Advertisement -spot_img

पटना/ उदिप्त : ठंड अब खत्म हो चुकी है और गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है। जी हां, यह इन्ही दोनों के बीच का समय है। साल भर का सबसे खूबसूरत समय। यह बसंत का महीना है, यानी बदलाव और पतझर का मौसम। बहुत सुहाना और खुसनुमा होता है यह मौसम। कुछ ही दिनों में अब होली भी आएगी। लोग इस मौसम में सबसे ज्यादा एंजॉय करते है। पर इनसब के बीच वे भूल जाते है कि इस बदलाव का मौसम का असर सीधा हमारे शरीर पर भी पड़ता है। जैसा कि हम जानते है कि हमारा शरीर तीन तत्व से बना होता है। वात, कफ और पित। वात मतलब वायु, कफ़ मतलब जल और पित मतलब अग्नि।

तो यह जो महीना होता है इसमे सबसे तेज़ी से हमारे पित पर असर पड़ता है। पित को अगर आसान भाषा में कहा जाए तो यह हमारे शरीर के अग्नि अर्थात गर्मी को कहा जाता है। हमारे शरीर के लारग्रंथि, आमाशय, अग्नाशय और लिवर से निकलने वाले रस को ही पीत कहा जाता है। जिस तरह भोजन को पकाने के लिए हमारे चूल्हे काम आते है वैसे ही भोजन को शरीर मे पचाने के लिए पित की जरूरत है। पित वैसे तो मानव शरीर के अलग अलग हिस्सों में भिन्न मात्राओं में पाया जाता है पर इसका मुख्य स्थान हृदय से नाभि तक रहता है।


एशिया फेम के आयुर्वेदिक डॉक्टर अखौरी प्रमोद कहते है, “जिस प्रकार अग्नि का दो मुख्य होता है, जला कर खत्म कर देना और ऊर्जा देना। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे इस्तेमाल करते हैं। ठीक उसी तरह पित भी हमारे शरीर में अगर अधिकता में हो जाए तो हमें जला देगी और अगर सही मात्रा में हो तो यही हमारे भोजन को सही से पका कर हमें ऊर्जा देगी। “

बता दे कि हमारे आयुर्वेद के अनुसार साल भर में दो बार ऐसा होता है जब हमारा शरीर जादा पित बनाता है। पहला तो चैत (मार्च) और दूसरा अश्विन (अक्टूबर)। ऐसा इसलिए भी है क्युकी ये बदलाव का मौसम होता है। इसी के चलते इस समय लोग पेट के समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित रहते हैं।

क्या है उपाए?
डॉ प्रमोद कहते है कि इससे बचने का उपाय बहुत सरल और साधारण है। प्राय पित सबसे जादा उनलोगों को परेशान करती है जो सूर्य उदय के बाद भी सोते रहते है। इसलिए इस मौसम में सवेरे उठने से इससे बचा जा सकता है। दूसरी बात जो हमें ध्यान रखना चाहिए कि बहुत लेट तक खाली पेट ना रहे, खास कर सुबह के समय।

खाली पेट सुबह सुबह चाय को अवॉइड ही करना सही रहेगा। अगर बात भोजन की करे तो सलाद, हरि सब्जियां, ताजे फल जितना अधिक से अधिक हो सके, उसका सेवन करे। तेल मसाला एक सीमित मात्रा में ही खाए।और सबसे जादा ध्यान प्राणायाम और योगासन पर देने की जरूरत है। त्रिकोणासन, सर्पासन, जानुशिरासन जैसे आसान पित को संतुलित रखने के लिए बहुत लाभकारी है।

- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -
Related News
- Advertisement -