पूर्णिया : चंद भूमाफिया एवं रसूखदार अपने हिसाब से नगर निगम को चलाना चाहते है, इन्हें नाला एवं कैनाल के जीर्णोद्धार और शहर के अतिक्रमण से कोई मतलब नहीं, बस इनकी ठसक कम नहीं होनी चाहिये, पढ़ें पूरी खबर

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पूर्णिया:-09 जनवरी(राजेश कुमार झा) शहर डूबे तो डूबे, सड़कें चलने लायक हो न हो,आम लोग त्राहिमाम करे तो करे,लेकिन इन भूमाफिया और रसूखदारों की ठसक नहीं जानी चाहिये.इन्हें शहर के विकास से कोई लेना-देना नहीं.इन्हें तो सिर्फ अपनी जेबें भरने से मतलब है. बताते चलें कि शहर में सरकारी जमीन के अतिक्रमण कर अपना धंधा चलाने वाले रसूखदार, नाजायज तरीके से भवन का निर्माण करने वाले,नक्शा के विरुद्ध बहुमंजिला इमारत खड़ी करने वाले एवं नाला और कैनाल को अतिक्रमित कर बड़े-बड़े महल बनाने वाले चंद लोग नगर निगम की कार्यवाही से घबरा कर शिकायतें करनी शुरू कर दी है.

ताकि नगर निगम दबाब में आये और इन चंद लोगों को राहत मिले.ताकि आम लोगों के बीच ये मैसेज जाये कि चंद रसूखदार और भूमाफियाओं ने पैसे और पैरवी के बल पर नगर निगम को झुकने पर मजबूर कर दिया.इसके बाद ये चंद लोग आम लोगों के बीच अपनी ठसक दिखा कर आम लोगों के बीच अपना सिक्का जमा सके.बताते चलें कि नगर निगम प्रशासन ने बारिश के मौसम में शहर की दुर्दशा को देखते हुए नाला और कैनाल के जीर्णोद्धार का फैसला लिया.

जिससे बारिश के समय आम लोगों को परेशानी से बचाया जा सके.इसके बाद नगर निगम ने शहर के 42 नालों की खोज की तो पता चला कि इन सभी नालों पर बड़े-बड़े महल बन गए है. लेकिन नगर निगम ने आम लोगों के कष्ट को देखते हुए नालों के जीर्णोद्धार पर काम करना शुरू किया तो बड़े-बड़े रसूखदारों और भूमाफियाओं के पसीने छूटने शुरू हो गए.दूसरी तरफ नाजायज तरीके से और नक्शा के विरुद्ध भवन का निर्माण करने वालों पर जब नकेल कसनी शुरू हुई तो सबके सब नगर निगम के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए.

लेकिन जब इन लोगों को नगर निगम से कोई राहत नहीं मिली तो ये लोग माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने शुरू किए. लेकिन जब माननीय उच्च न्यायालय से भी इन लोगों को कोई राहत नहीं मिली तो अब ये लोग पैसे के बल पर काम को रुकवाने की कोशिश में लग गए.जाहिर है कि इन लोगों की हरकतें जनता तो देख ही रही है.जनता को भी ये समझ में आ गया कि शहर के विकास के लिये ये चंद भूमाफिया और रसूखदार लोग क्या सोच रहे है.