Purnia: दलाल मेहरबान तो डॉक्टर मालामाल, दलालों की सरपरस्ती में चलता है लाइन बाजार में डॉक्टरों की दुकान

पूर्णियाँ

जिस डॉक्टर के पास जितना अधिक दलाल, उनके पास उतनी ही अधिक भीड़, क्लिनिक बन्द होने से पहले दलालों को पहुंच जाती है अपनी दलाली, डीएम साहब भोलेभाले गरीब मरीजों को बचाएं इन दलालों से

Rajesh Kumar Jha: एक कहावत है, खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान.इस कहावत तो चरितार्थ कर रहे है लाइन बाजार पूर्णिया के डॉक्टर एवं दलाल. या यूं कहें कि दलाल मेहरबान तो डॉक्टर मालामाल. बताते चलें कि मेडिकल का हब कहे जाने वाले पूर्णिया का लाइन बाहर, जहां तकरीबन 1500 डॉक्टरों के पास हर रोज तकरीबन 20 से 25 हजार रोगी और उनके सहयोगी आते है. जहां तकरीबन 3500 मेडिकल दुकान,400 से अधिक पैथोलॉजी एवं एक्सरे है. जहां एक दिन में तकरीबन 100 करोड़ का ट्रांजेक्शन हर रोज होता है. जहां बिना डिग्री के भी डॉक्टर प्रतिदिन कम से कम 5000 रुपया रोज की प्रैक्टिस करते है. इन सबके पीछे है दलाल और मेडिकल माफिया. जो जिस डॉक्टर के माथे पर हाथ रख दे तो वो देखते ही देखते कंगाल से करोड़पति बन जाता है.पूर्णिया में कोई भी डॉक्टर प्रेक्टिस शुरू करते वक्त अपना सफर रिक्शा में चलकर शुरू करते है.

और महज कुछ सालों की प्रैक्टिस के बाद बहुमंजिला क्लिनिक, बंगला एवं महंगी कार में चढ़ते हुए मिल जाते है. ये सब मेहरबानी है इन मेडिकल माफियाओं एवं दलालों का. जिनके सरपरस्ती में ये डॉक्टर अपने एथिक्स को भूल कर सिर्फ पैसे कमाने में जुट जाते है. जब कुछ सालों में नाम जम जाता है तब ये समाज के गिने-चुने व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल हो जाते है. बताते चलें कि लाइन बाजार में जिस तरह मेडिकल माफिया सक्रिय है और जिन्हें डॉक्टरों का भी सपोर्ट है.

वो दिन दूर नहीं कि दूसरे जिले एवं राज्यों से आने वाले लोग लाइन बाजार में इलाज करवाना ही छोड़ दें. बताते चलें कि लाइन बाजार में कितने ही ऐसे क्लिनिक, अस्पताल, डॉक्टर, पैथोलॉजी, एक्सरे एवं मेडिकल दुकानें है. जो बिना डिग्री और लाइसेंस की अपनी दुकान चलाते है. कई बार जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की कारवाई हुई, लेकिन सब ढाक के तीन पात साबित हुए. डीएम साहब इन मामलों में कृपया ध्यान दें, वरना भोलेभाले मरीज यूं ही बर्बाद होते रहेंगे एवं मरते रहेंगे.

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