पूर्णिया : हांड कंपकपाती ठंड और ठिठुरते परिवार…जो खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर है..क्या करें पापी पेट का सवाल है जनाब..न इन्हें कम्बल ही मिला और न ही अलाव…खबर छपने के बाद फोटो खिंचाने पहुंचेंगे नेता, एनजीओ और पैसे वाले…पढ़ें बिफोरप्रिन्ट की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट

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पूर्णिया:-09 जनवरी(राजेश कुमार झा)हांड कंपकपाती ठंड और ठिठुरते परिवार.जो खुले आसमान के नीचे अपने परिवार के साथ जीने को मजबूर है.क्या करें पापी पेट का सवाल है जनाब.इन्हें न तो कोई कम्बल ही देने वाला है और न ही कोई अलाव की ही व्यवस्था है.खबर छपने के बाद फोटो खिंचाने पहुंचेंगे नेता,एनजीओ और पैसे वाले.बताते चलें कि इन ठिठुरती ठंड में रात के 10 बजे के बाद बिफोरप्रिन्ट मीडिया की टीम ने शहर के कई क्षेत्रों का भ्रमण किया.

सड़क किनारे तकरीबन सैकड़ों ऐसे परिवार को देखा जो खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक,पुआल और बोरे की चट्टी बनाकर इन कड़ाके की ठंड में अपने परिवार को समेटे हुए सुबह का इंतजार कर रहे थे. बिफोरप्रिन्ट की टीम जब इन लोगों के पास पहुंची तो ये लोग कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से डरने लगे.इन लोगों ने कहा कि सर हम लोग दिनभर मजदूरी करते है और रात को सड़क के किनारे किसी तरह प्लास्टिक, पुआल और बोरा की चट्टी बनाकर सो जाते है.

हम लोगों का फोटो खींचियेगा तो पुलिस हमलोगों को यहाँ से भगा देगी.हम लोगों पर रहम कीजिये.जब उनसे पूछे कि आप लोगों को कोई कम्बल और अलाव मिला या नहीं तो उन लोगों ने कहा कि सर हमलोगों को भगवान के अलावा कोई नहीं है देखने वाला.हम लोग सुबह के इंतजार होने के लिये किसी तरह रात भर सोते है.सर हमलोग दिनभर मजदूरी करते है.किसी तरह जीवन गुजारते है.हम लोगों को कोई भी सुविधा नहीं है.बताते चलें कि शहर के सभी सड़कों के किनारे ऐसे सैकड़ों परिवार है.जो कहीं किसी दूसरे जिले से आये हुए है.कुछ ऐसे परिवार भी है जो पुलिस से प्रताड़ित होकर एक जगह छोड़कर दूसरे जगह चले गए है.