बढ़ते तापमान से रबी उत्पादन पर संकट, गेहूं की उपज मे 15 से 20 प्रतिशत तक कमी की सम्भावना

मुजफ्फरपुर (ब्रह्मानन्द ठाकुर): उत्तर बिहार मै पूस महीने में फागुन जैसी धूप का एहसास होने लगा हेःइस मौसम मे तापमान में वृद्धि होने के कारण गेहूं की उत्पादकता मे वैज्ञानिक 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी होने की बडा त कह रहे है। पिछले एक सप्ताह के अधिकतम और न्यूनतम तापमान मे काफी बदलाव आया है। डाक्राटर राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विधानसभा भाग द्वारा तापमान से सम्बंधित आंकडे बताते है कि जनवरी के प्रथम सप्ताह मे अधिकतम तापभान मे 3 से 4 डेढ ग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई। 2 जनवरी को अधिकतम तापमान 23 डिग्री ,न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सूल्सियस यस रहा।

3 एनवरी को अधिकतम 23.5 और न्यूनतम 8.3 ,4 जनवरी को अधिकतम 25.5 और न्यूनतम12.5 , 6 जनवरी को अधिकतम 26 डिग्री , न्यूनतम 15 डिग्री ,7 जनवरी को अधिकतम 25.6 और न्यूनतम13.3 ,8 जनवरी को अधिकतम24.5 और न्यूनतम 13.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। विश्वविद्यालय के मौसम विभाग द्वारा9 से 13 जनवरी तक के पूर्वानीमान मे कहा गया है कि इस अवधि में अधिकतम तापमान 22 से24 डेढ ग्री और न्यूनतम 9 से 10 डिग्री सेल्सियस के बारे च रह सकता है। अधिकतम तापमान मे 3 से5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है। कृषि वैज्ञानिक डाक्टर गोकुलेश झा बताते हैं कि यह मौसम गेहूं की फसल मे व्यांत (टिलरिंग). का मौसम है।अच्छी व्यांत के लिए ठंढ की जरूरत होती है।

जितना ज्यादा ठंढ पडेगा ,गेहूं के पौधे में व्याऔत उतनी ही ज्यादा होगी।8 से 10 डिग्री न्यूनतम तापमान ईसके लिए अनुकूल होता हैः तापमान अधिक होने के कारण गेहूं मे अतिरिक्त कल्ले नहीं फूटेऔगे। इससे उपज मे कमी होगी। बाढ और वर्षा से जलजमाव के कारण किसानो ने बडे पेमाने पर देख सम्बर के अंतिमयात्रा म सप्ताह मे गेहूं की बुआई की हैः। तापमान मे अचानक हुई वृद्धि का दुष्प्रभाव पिछात बुआई वालासिता गेहूं पर ज्यादा देखा जा रहा है।गर्मजोसी के कारण पौधै मे तब जी से बढवार तो हो रही है मगर कल्ले नहीं निकल रहे हैं।