सहरसा: पिता ने नींद में सो रहे जवान बेटे की गोली मारकर कर दी हत्या

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सहरसा(रमण ठाकुर): धन और दौलत के लालच में बेटे के द्वारा बाप की हत्या की कई घटनाएं सामने आ चुकी है। मगर संपत्ति को लेकर बाप के हाथों बेटे के हत्या किये जाने का मामला बहुत कम ही सामने आता है। वो भी सिर्फ एक बीघा जमीन को लेकर। जी हां। सहरसा जिले के सोनवर्षाराज थाना इलाके में शनिवार की देर रात्रि ऐसी ही एक घटना घटी। जब एक कलयुगी बाप ने अपने चाचा के साथ गहरी नींद में सो रहे जवान बेटे की कनपटी में नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद बाप फरार हो गया। इस घटना को जिसने सुना वह दंग रह गया और हत्यारे के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की पुलिस से गुहार लगायी ।

सोनवर्षाराज थाना प्रभारी सुमन कुमार ने लाश को पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया और लोगों को आश्वस्त किया कि हत्यारे को बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जायेगा। सोनवर्षाराज थाना स्थित शाहपुर गांव के मंतोष यादव द्वारा देर रात्रि किये गये इस कुकृत्व कि चारों ओर निंदा की जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक मंतोष की पहली शादी बिहरा थाना के बलुवाहा गांव में ललिता देवी के साथ हुआ। इसमे एक बेटा दिलखुश और एक बेटी खुशबू है। करीब बारह साल पहले मंतोष ने बरघुरा गांव के योगेंद्र यादव की बेटी रानू देवी के साथ दूसरी शादी कर लिया। मंतोष अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहता था। जबकि दिलखुश अपनी बहन और मां के साथ अलग रहता था। जब यह हालत मंतोष के पिता फुलेश्वर यादव ने देखा तो उसे रहा नही गया और उन्होंने पोता दिलखुश को एक बीघा जमीन दे दिया।

मंतोष के मन मे यहीं से जहर घुलने लगा था। ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन महीने से दिलखुश अपने बाप के पास रहने लगा था। शनिवार की रात सब खाना खाकर सो गये। दिलखुश अपने चाचा संतोष के साथ घर के बरामदे पर सोया। मध्य रात्रि में मंतोष जगा और उसने देशी कट्टा में गोली भरकर बेटे की कनपटी पर फायर कर दिया। सटाकर गोली मारे जाने के चलते दिलखुश की मौके पर ही मौत हो गयी। सिमरी बख्तियारपुर एसडीपीओ मृदुला सिन्हा का भी कहना है कि यह घृणित काम एक बाप ने महज एक बीघा जमीन को लेकर किया। एसडीपीओ ने कहा है कि किसी भी हालत में दोषी बख्शे नहीं जायेंगे। रविवार को पूरे दिन शाहपुर गांव में लोगों की भीड़ जुटी रही। जिसने भी कहीं इस घटना को सुना वो फौरन घटनास्थल पर पहुंचकर कलयुगी बाप को जमकर खरी खोंट सुनाया। गांव में जमा लोगों की भीड़ की एक ही मांग थी कि हत्यारे को कठोर से कठोर सजा मिले ताकि फिर से ऐसी घटना न देखने और न ही सुनने को मिल सके।