DGP के तेवर देख SP ने थानेदार को लाईन हाजिर की जगह सस्पेंड का दिया आदेश

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सहरसा/रमन ठाकुर: जब से सूबे के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय बने है तब से उनका खौफ फैलते ही जा रहा है। यह खौफ अपराधियों से लेकर विभागीय स्तर के वरीय अधिकारियों पर भी दिखने लगा है। ताजा मामला सहरसा से जुड़ा हुआ है। रविवार को एसपी राकेश कुमार ने सदर थानेदार आर के सिंह को पहले लाईन हाजिर करने का आदेश जारी किया। फिर दो घंटे बाद एसपी की ओर से बताया गया कि थानेदार आर के सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। आखिर महज दो घंटे के भीतर ही एसपी को अपने पुराने आदेश क्यों बदलने पड़े?

इस बात को लेकर सभी हैरान थे। मगर जानकार बताते हैं कि जिस वीडियो वायरल मामले को लेकर सदर थानेदार को लाईन हाजिर करने का आदेश एसपी ने जारी किया उसे राज्य पुलिस मुख्यालय बारीकी से ले रहा था। वायरल वीडियो को लेकर पुलिस की काफी किरकिरी हुई क्योंकि जिस समारोह का वीडियो वायरल हुआ उसमें प्रतिबंध के वावजूद शराब की धार बही। सैकड़ों राउंड फायरिंग की गई और इसी दौरान एक डांसर आकृति उर्फ मधु की गोली लगने से मौत हो गयी।

जिले के सोनवर्षाराज थाना के बिराटपुर गांव में जिस शादी समारोह में यह सब सुशासन की सरकार में हुआ उससे आयोजकों से अधिक बदनामी पुलिस के मत्थे मढ़ गयी। आमलोग खुलकर बोलने लगे कि यही सुशासन और राज्य में शराब पर प्रतिबंध है। वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से सदर थानेदार आर के सिंह का जो बढ़ चढ़कर खातिरदारी कर रहा है वह शराब कारोबारी और मुख्य अभियुक्त है। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि थानेदार आर के सिंह को लाइन हाजिर किये जाने की खबर मिलते ही डीजीपी मुख्यालय इसको लेकर नाराज हो गया।

फिर आनन फानन में एसपी द्वारा सस्पेंड किये जाने की जानकारी मीडिया को दी गयी। हालांकि सूत्र यह भी बताते है कि वायरल वीडियो की उच्च स्तरीय जांच हो रही है। उसके बाद निलंबित थानेदार को और भी कई तरह की विभागीय जांच प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। सदर थानेदार से पहले डांसर हत्याकांड में सोनवर्षाराज के थानेदार सुमन कुमार को निलंबित किया गया था। पुलिस सूत्र मानते है कि अगर डीजीपी इस मामले का संज्ञान नही लेता तो इतने गंभीर वायरल वीडियो की सजा सिर्फ लाईन हाजिर होना ही रह जाता।