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नीतीश को शिवानंद की खरी-खरी,पहले बिहार को शराब में डुबोया, अब महात्मा गांधी के नाम पर कर रहे हैं नौटंकी!

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स्टेट डेस्क /पटना: राजा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य शिवानंद तिवारी ने शराबबंदी और समाज सुधार अभियान को नीति कुमार की नौटंकी करार दिया है। फेसबुक पर अपने पोस्ट में तिवारी ने लिखा है, बिहार को शराब में डुबोने वाले नीतीश गांधी का नाम पर अब नाटक कर रहे हैं। तिवारी ने लिखा है, शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार पर जुनून सवार है. सोलह सतरह वर्षों के अपने शासन काल में किसी भी मुद्दे को लेकर नीतीश कुमार में ऐसा जुनून नहीं दिखाई दिया.

अभी जो उनका समाज सुधार अभियान चल रहा है यह उनका व्यक्तिगत या दलीय अभियान नहीं है. बल्कि यह पूरी तरह सरकारी अभियान है. इस अभियान का संपूर्ण खर्च गरीब बिहार के सरकार के खजाने से हो रहा है. बिहार गरीब प्रदेश है. स्वयं नीतीश कुमार और उनके लोग मानते हैं कि जब तक बिहार को विशेष राज्य के दर्जा के रूप में विशेष सहायता नहीं मिलेगी तब तक बिहार अगली कतार के राज्यों में शामिल नहीं हो सकता है.

ऐसे गरीब प्रदेश का संसाधन एक व्यक्ति को अपनी सनक में लुटवाता देखकर बहुत पीड़ा होती है. ऐसा नहीं है कि नितीश कुमार में शराब के प्रति जो वितृष्णा दिखाई दे रही है वह इमानदार है. जिस किसी को मेरी इस बात पर शुबहा हो वह स्वयं इसकी तस्दीक़ कर ले. इसका बहुत साधारण तरीक़ा है. 2005 में नीतीश कुमार की जब सरकार आई उस समय उत्पाद विभाग का राजस्व कितना था और जब नीतीश कुमार ने 2015 में जब शराब बंदी लागू की उस समय तक उत्पाद विभाग का राजस्व कितना पहुँच गया था.

यह आंकड़ा ही बयां कर रहा है कि 10 बरसों तक नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों को छक कर शराब पिलाई. 2015 में नीतीश कुमार की आत्मा पर अचानक गांधी जी सवार हो गये. अब गांधी जी की दुहाई देकर लोगों को शराब पीने से मना कर रहे हैं. नीतीश जी ऐसा क्यों कर रहे हैं ! नीतीश जी के विषय में मेरी समझ बहुत स्पष्ट है. चुनौतियों से जूझते नहीं हैं नीतीश बल्कि पलायन करते हैं. नहीं तो क्या वजह है कि लगभग अठारह बरसों से बिहार में इनकी सरकार है. विकास पुरुष कहलाते हैं.

लेकिन नीति आयोग का ताज़ा रिपोर्ट बता रहा है कि बिहार में 52% लोग ग़रीब हैं. सबसे शर्मिंदगी की बात तो यह है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के मुताबिक़ बिहार के पाँच वर्ष से कम उम्र के 48.3 फ़ीसदी बच्चे बौनापन के शिकार हैं. यह सबसे क्रूर क़िस्म की ग़ैर बराबरी है. क्योंकि इन बच्चों ने ऐसी गरीब माँ के कोख से जन्म लिया है जिनको गर्भ के दरम्यान पौष्टिक आहार नहीं मिला. फलस्वरूप जन्म के समय इन बच्चों का वज़न कम रहा और उसके बाद पाँच बरसों तक उनको पौष्टिक आहार नहीं मिला.

नतीजा है कि वह बच्चा आजीवन शरीर और मस्तिष्क दोनों से बौना ही रहेगा. यह हमारा आरोप नहीं है बल्कि 23 अगस्त 2020 को महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने एक सवाल के जवाब में लोक सभा में यह बताया है. नीतीश जी कैसे विकास पुरुष हैं! कैसा उनका विकास है ? अगर नज़र दौड़ाइएगा तो इनके विकास में चमक दमक दिखाई देता है. हड़ताली मोड़ पर ऐसा म्यूज़ियम दिखाई देगा जहाँ दिन भर में सौ लोग भी नहीं जाते हैं उसकी लागत कितना सौ करोड़ है ! पता कर लीजिए. अगली योजना नए म्यूज़ियम से पुराने म्यूज़ियम को जोड़ने के लिए सुरंग बनाने की है. जिसमें बिजली से चलने वाली सवारी से लोग इधर से उधर आ जा सकेंगे.

इनके शासन काल में बने बड़े बड़े, ऊँचे ऊँचे भवनों को देखिए. कई ऐसे भवन बनाये बनाए हैं जिनका कोई उपयोग नहीं है. कोई बता रहा था कि दशरथ माँझी के नाम पर कई कमरों का भवन बना है. लेकिन उसकी कोई उपयोगिता नहीं है. इनके आवासीय परिसर में ही कितना निर्माण हुआ है. फोर केजी में जो नया और आधुनिक सभागार का निर्माण हुआ है उसमें पिछले एक वर्ष में कितनी सभाएँ हुई हैं. !

इस ग़रीब राज्य में दोनों हाथ से पैसा लुटाने वाला आदमी गांधी का नाम लेता है तो ग़ुस्सा आता है. गाँधी को गाली दी जाती है डर के मारे ज़ुबान नहीं खुलती है. मोतिहारी में गांधी की मूर्ति तोड़ दी गई. मौन हैं. अभी समस्तीपुर में इनके पार्टी का एक मुसलमान कार्यकर्ता की भीड़ ने हत्या कर दी. उसको जलाकर गाड़ दिया गया. कारण उसका धर्म था. लेकिन नीतीश जी ने अभी तक इन पर अपनी ज़ुबान नहीं खोली है. नीतीश कुमार के समाज सुधार एजेंडे में सामाजिक या सांप्रदायिक सद्भाव का स्थान नहीं है.

क्योंकि जिस गठबंधन में वे हैं, उसमें सांप्रदायिक सौहार्द के लिए अभियान की इजाज़त कहाँ है. जबकि महात्मा गांधी सांप्रदायिक हिंसा के ही शिकार हुए थे. धीरे-धीरे आज वही माहौल बिहार में बनता जा रहा है. मुझे अंदेशा है कि इतिहास में नीतीश कुमार को ज़रूर स्थान मिलेगा. लेकिन इतिहास इनको चुनौतियों से मुक़ाबला करने वाले नेता के रूप में नहीं बल्कि घुटना टेकने वाले मुख्यमंत्री के रूप में ही याद रखेगा.

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