कल्याण के सम्पादक खेमका जी के निधन से दुखी हैं सीतामढ़ी के लोग, उनको भी था बेहद लगाव

सीतामढी/ रंजीत मिश्रा : गीता प्रेस गोरखपुर के अध्यक्ष और सनातन धर्म की प्रसिद्ध पत्रिका कल्याण के संपादक राधेश्याम खेमका के निधन से सीतामढ़ी में शोक की लहर है। सीतामढ़ी में रह रहे सगे सम्बन्धी, ननिहाल के परिवारजनों व उनसे बड़ी संख्या में जुड़े सीतामढ़ी वासियों ने उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दी है।

राधेश्याम जी ने वाराणसी में केदारघाट स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली, वे 87 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार हरिश्चंद्र घाट पर किया गया। मुखग्नि एकमात्र पुत्र राजा राम खेमका ने दी। सीतामढ़ी में कल्याण के नियमित पाठक व अध्यात्म से जुड़े राजेश कुमार सुन्दरका ने बताया कि खेमका जी का ननिहाल सीतामढ़ी में है। उन्होंने अपना छात्र जीवन सीतामढ़ी में ही बिताया था और स्नातक की शिक्षा गोयनका महाविद्यालय से प्राप्त की थी। राधेश्याम जी का सीतामढ़ी से बेहद लगाव था, गीता प्रेस के सँभालने की व्यस्तता एवं कल्याण के सम्पादक रहते हुए भी बराबर सीतामढ़ी आते जाते रहते थे। राधेश्याम जी के सीतामढ़ी में पशुपतिनाथ लक्कड़, लक्ष्मीनारायण लक्कड़, शंकर लाल लक्कड़ व विश्वनाथ लक्कड़ चार मामा थे, जिनसे उनका काफी स्नेह था।

चारों मामा के स्वर्गवास के बाद भी राधेश्याम खेमका ने सीतामढ़ी से अभिभावक के रूप में अपना नाता बनाया रखा। पारिवारिक कार्यक्रम में आना जाना और समाज के लोगों के साथ बौद्धिक व वैचारिक सम्बन्ध जीवन के अंतिम समय तक बना रहा। सीतामढ़ी में सामाजिक कार्यकर्ता सुन्दरका ने बताया कि राधेश्याम खेमका ने 40 वर्षों से गीता प्रेस में अपनी भूमिका का निर्वाहन करते हुए अनेक धार्मिक पत्रिकाओं का संपादन किया। उनमें कल्याण प्रमुख है। सीतामढ़ी के भाँजे व मृदुल वाणी के लिए प्रसिद्ध राधेश्याम खेमका के पिता सीताराम खेमका मूलतः बिहार के मुंगेर जिले से वाराणसी आए थे। दो पीढ़ियों से खेमका वाराणसी निवासी रहे और धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ और वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद, कथा व्यास रामचन्द्र जी डोंगरे जैसे संतों से विशेष संपर्क और सानिध्य रहा।

खेमका वाराणसी की प्रसिद्ध संस्थाओं मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल गोदौलिया, बिड़ला अस्पताल मछोदरी, काशी गोशाला ट्रस्ट से जुड़े रहे और वाराणसी कागज व्यवसाय से भी जुड़े रहे। रामविलास मंदिर ट्रस्ट, सीतामढ़ी, बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन, सीतामढ़ी, कमलेश शर्राफ, राधेश्याम मिश्रा, सजन हिसारिया, राजेश कुमार सुन्दरका व नरोत्तम व्यास समेत कई सदस्यों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपूरणीय क्षति बताया है।