अक्षय ऊर्जा रोडमैप का क्रियान्वयन सुनिश्चित करे राज्य सरकार: सीड

मुजफ्फरपुर: सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) और राज्य के प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों ने राज्य सरकार से गत विधानसभा चुनाव में अक्षय ऊर्जा और सततशील विकास से संबंधित किए गए वायदों को पूरा करने की अपील की है। इस बात पर जोर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने और कोविड-19 महामारी के बाद सुस्त हुई राज्य अर्थव्यवस्था को बेहतर करने में विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा (डीआरई) रोडमैप एक व्यावहारिक और कारगर उपाय है, इसलिए अब इस पर ठोस क्रियान्वयन की पहल होनी चाहिए.



इस मुद्दे पर सोमवार, 28 दिसंबर को मुजफ्फरपुर में आयोजित मीडिया कॉन्फ़्रेंस को पत्रकार हेमंत कुमार, अभिनंदन और राकेश सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। उन्होंने बताया कि बीते चुनाव में सीड और सिविल सोसाइटी संगठनों ने एक सिटिजन कैंपेन ‘बोलेगा बिहार, अक्षय ऊर्जा इस बार’ चलाया था, जिसे अपार जन समर्थन मिला और यह अक्षय ऊर्जा समाधानों पर एक राजनीतिक सर्वसम्मति बनाने में कामयाब रहा था.

उन्होंने बताया कि यह अभियान बिहार के सर्वांगीण विकास के लिए डीआरई समाधानों को केंद्रबिंदु बनाने पर जोर देता है और इसी अनुरूप सभी राजनीतिक दलों ने वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठ कर इससे जुड़े वायदे और संकल्प किए थे. इस अवसर पर अभिनन्दन कुमार, मीडिया अफसर, सीड ने कहा कि “गत चुनाव में जिस तरह से सभी राजनीतिक दलों ने जनता की मांगों के अनुरूप सर्वसम्मति से बिहार के विकास के लिए डीआरई समाधानों पर महत्वपूर्ण वायदे किए, हम उनकी प्रशंसा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि बिहार में अक्षय ऊर्जा आधारित सततशील विकास के कार्य में पक्ष और विपक्ष की सभी पार्टियों का सहयोग मिलेगा. चूंकि राज्य में नई सरकार ने कार्यभार संभाल लिया है, ऐसे में यह समय की मांग है कि वह अपने वायदे के अनुरूप सुपरिभाषित और समयबद्ध आधार पर डीआरई रोडमैप बनाए और इसे अविलम्ब लागू करे.”


सिविल सोसाइटी संगठनों की तरफ से बात रखते हुए श्री हेमंत कुमार, वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि “यह समय की मांग है कि सरकार और सभी राजनीतिक दलों को चुनावी वायदों को वास्तविक धरातल पर लाने के लिए सार्थक कोशिश करनी चाहिए. निश्चय ही राज्य सरकार का बड़ा दायित्व है कि वह अक्षय ऊर्जा से संबंधित किए गए वायदों और संकल्पों को न भूले, बल्कि ठोस कार्यक्रमों और नीतियों के जरिये इन्हें सही अर्थों में पूर्ण करे. बिहार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है. राज्य में क्लाइमेट चेंज की समस्या और कोविड-19 महामारी के कारण कमजोर हुई अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कृषि, स्वास्थ्य, अर्थ-व्यापार आदि क्षेत्रों में विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा का व्यापक इस्तेमाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. इसके अलावा डीआरई सोल्यूशंस पलायन को रोकने, नए रोजगार और आजीविका के स्रोत पैदा करके खुशहाली का नया दौर शुरू कर सकता है.”

सिविल सोसाइटी संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार को एक नए विज़न रोडमैप की आवश्यकता है, जिसमें डीआरई मिशन, क्लीन एयर फ्रेमवर्क, कृषि क्षेत्र का सौरकरण, सस्टेनेबल अर्बन ट्रांसपोर्ट मिशन, हेल्थकेयर के लिए सोलर मिशन पर ठोस पहल की जाए, ताकि नए रोजगार और आजीविका सृजन से बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हों और तीव्र आर्थिक विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके.