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सुपौल: कोसी के स्पर के निर्माण के समय जमीन दी, तीन दशक बाद भी मुआवजा नहीं मिला

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सुपौल/प्रतिनिधि: दुखदायनि कोसी के तांडव को स्थिर करने के लिए जब कोसी तटबंध पर स्पर का निर्माण हो रहा था तो सुपौल में केन्द्रीय उर्जा राज्य मंत्री राजकुमार सिंह के गांव के लोग ने कोसी के स्पर के निर्माण के समय अपनी जमीन दी .लेकिन आज तीन दशक बीत जाने के बाद भी उन्हे मुआवजा नही मिला .जबकि कोसी में तीन दशक में कम से कम हजारों करोङ समा गया होंगे .कई अधिकारी से लेकर संवेदक लाखो से अरबो में पहुंच गये होंगे लेकिन अपनी जमीन गवां चुके इन लोगो को मुआवजा नही मिला है।

सन् 1987 का वो दिन जब कोसी नदी के 46,65 और 80 किमी पर स्पर का निर्माण करने के लिए सरकार ने लोगो से जमीन की मांग की उस वक्त लोगो ने कुछ मुआवजा मिलने और कोसी से मुक्ति मिलने की आस लिये अपनी 27 एकङ उपजाऊ जमीन स्पर निर्माण के लिए सरकार को दिया .उस वक्त सरकार ने भी खुब कागजी खानापुर्ती की लेकिन लोगो को मुआवजा नही दिया .इन तीन दशक में जिला समाहारणालय में कई जिला पदाघिकारी की फेरबदल हो गयी ,जनता दल की सरकार से जदयू की डबल इंजन वाली सरकार आ गयी लेकिन इन्हे मुआवजा नही मिला .कुछ साल पहले सुपौल के तत्कालिन डीएम कुमार रवि के इस मामलें पर कार्रवाई शुरु तो हुई थी लेकिन उनके तबादले के बाद फिर से फाईल को रद्दी के टोकरी में फेंक दिया गया।

इस बाबत लोगो ने कार्यापालक अभियंता पुर्वी तटबंध प्रमंडल सुपौल ,विशेष भू अर्जन पदाधिकारी कोसी योजना सहरसा को भी पत्र लिख कर मुआवजे की मांग की थी .साल 2014 में भू अर्जन पदाधिकारी कोसी योजना सहरसा ने मुआवजे देने के लिए 4 करोङ 43 लाख रुपैये राशि की आवश्यक्ता को लेकर तत्कालिन डीएम कुमार रवि को भी इसकी जानकारी दी थी वही उन्होने ये भी बताया कि इस जमीन अधिग्रहण से जुङे कई कागजात नही रहने की वजह से मुआवजा नही मिलने की बात कही थी .लेकिन लोगो में नये डीएम महेन्द्र कुमार से मुआवजा मिलने की आश जगी है .हलांकि इस मामले पर डीएम ने आँफ द रिकोर्ड बताया कि इससे सबंधित जांच फिर से शुरु करने के बाद ही कुछ भी बयान दिया जा सकता है।

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