सुपौल: एक साल बाद भी किडनी चोरी मामले में नहीं मिला पीड़िता को इंसाफ

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सुपौल/प्रतिनिधि: सुपौल में  एक निजी क्लिनिक में महिला की किडनी चोरी मामलें में आज एक साल से अधिक  बीतनें को है लेकिन पीड़िता को आज तक न्याय नही मिल सका है. पीङिता को सुपौल समारणालय से और सिविल सर्जन कार्यालय में मिले पत्रों की संचिका जरुर मोटी हो गयी है लेकिन न्याय उससे उतना ही दूर है. इतनें दिनों में पीड़िता की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है और स्वास्थ महकमा चुप्पी साधे हुए है ।

सुपौल सदर ईलाके  के बैरों गांव की रहनें वाली एक महिला का सिजेरियन आँपरेशन शहर के मेरी गोल्ड रौनक राज हाँस्पीटल में डां शीला राणा के हाथों  23 जून 2017 को हुई थी. जिसके बाद पीङित महिला को एक बच्ची हुई .आँपरेशन के 10 दिनों बाद पीड़िता को अस्पताल से छोङ दिया गया .लेकिन कुछ माह बीतने के बाद पीङिता को लगातार पेट में दर्द होने लगा. जिसके बाद पीङिता ने शहर के एक दुसरे निजी क्लिनिक ईलाज करानें पहुँची तो शुरुआती जांच के बाद उसके पैरो की जमीन खिसक गयी .डांक्टर ने उसे बताया कि उसकी राईट किडनी नही है औऱ लेफ्ट किडनी में स्टोन है .जिसकी वजह से उसे दर्द होता है.

उसके बाद पीड़िता ने तीन बार अल्ट्रासाउंड कराया लेकिन हर बार मिली रिपोर्ट में उसकी किडनी नही होने की बात कही गयी.जिसके बाद पीड़िता के पति ने डांक्टर के खिलाफ लङाई शुरु की लेकिन आज एक साल से अधिक बीतने को है पीड़िता को न्याय नही मिल सका है. इधर पीङिता की हालत लगातार बिगङती जा रही है।

दरअसल इस आप्रेशन से पुर्व पीङित महिला को 19 जून 2016 को एक पुत्र हुआ था .हालांकि  डाक्टरों की लापरवाही के कारण उसकी मृत्यु हो गयी. लेकिन 19 जून 2016 को ही पीङिता ने सहरसा के गायत्री अल्ट्रासाउंड में अपना अल्ट्रासाउंड कराया था. जिसमें पीड़िता के पेट में दोनो किडनी थी. फिर जब एक साल बाद पीड़िता ने सुपौल के लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड में गर्भवति होने पर  डां शीला राणा के कहने पर ही अल्ट्रासाउंड कराया तो आप्रेशन से ठीक एक माह  पहले अल्ट्रासाउंड से दी गयी रिपोर्ट में उसका दोनो किडनी सही सलामत बतायी गयी फिर जब 20.07.2017 को डां शीला राणा के क्लिनिक में उसे सिजेरियन आप्रेशन हुआ.

उसके कुछ दिन बाद पेट में दर्द होने कि शिकायत पर उसी लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड ने जो रिपोर्ट दी गयी उसमें उसकी लेफ्ट किडनी नोट विजिबल बतायी गयी .इस बीच पीङिता ने दुसरे निजी क्लिनिक के चिकित्सक के कहने पर  3 से 4 बार पीएमसीएच तक जाकर अल्ट्रासाउंड कराया लेकिन हर बार किडनी गायब होने की रिपोर्ट दी गयी .इस बीच जांच भी जिला प्रशासन ने शुरु की लेकिन उसे न्याय नही मिल सका. इधर पीङित से स्वास्थ विभाग के कर्मी ने न्याय के लिए जांच के नाम पर  15 हजार घुस की भी मांग की.

सवाल यह है कि एक ही अल्ट्रासाउंड में किडनी होने औऱ नही होने की रिपोर्ट दी जा रही है जो कही न किडनी चोरी की पुष्टि करता है. इधर जिले का हर अधिकारी अपने तरीके से बचाव करते नजर आ रहे हैंबाइट।