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विदेश तक में बज रहा ललिता पाठक की मिथिला पेंटिंग का डंका

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सीतामढ़ी/रंजीत मिश्रा। बिहार के मधुबनी चित्रकला अथवा मिथिला पेंटिंग मिथिला क्षेत्र जैसे दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, सीतामढ़ी, मधुबनी एवं नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। इस कला को प्रारम्भ में रंगोली के रूप में रहने के बाद यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ो, दीवारों एवं कागज पर उतर आई है।

मिथिला की बेटी बेनीपट्टी प्रखंड के नरही निवासी ललिता पाठक जो 2014 में टीईटी पास कर उत्क्रमित मध्य विद्यालय लदनिया में कार्यरत हैं, ललिता से खास बातचीत के दौरान बताती है कि मधुबनी स्थित मिथिला आर्ट इंस्टीच्यूट में एक वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त की जिसमे प्रशिक्षक हीरा देवी, रानी झा व संतोष दास कुशल प्रशिक्षक द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर आर्थिक तंगी होने के कारण अपने पेंटिंग को व्यवसाय के रूप में देखना शुरू की, इतना ही नही ललिता के पति संजय कुमार पाठक भी पेंटिंग में साथ दिया।

पति-पत्नी की पेंटिंग देश ही नही विदेशों में भी जाना शुरू हुआ। फिर परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और बतौर शिक्षक भी स्कूल का काम करने के साथ पेंटिंग कर रही है। वर्तमान में मिथिला पेंटिंग के कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मधुबनी व मिथिला पेंटिंग के सम्मान को और बढ़ाये जाने को लेकर तकरीबन साड़ी, चादर,रुमाल,पर्दा समेत कई प्रकार के वस्तुओं पर मिथिला पेंटिंग की कलाकृतियों से सरोबार किया है। इसअद्भुत कलाकृतियों को विदेशी पर्यटकों व सैनानियों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है।

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