दो दिवसीय बिहार उद्यमिता सम्मेलन की हुई शुरुआत, प्रदेश में उद्योग-स्थापना के अवसरों पर चर्चा

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पटना (नियाज आलम) बिहार उद्यमी संघ नीति निर्माताओं और बिहारियों के बीच दो-तरफा संवाद की वर्षों पुरानी अपनी परंपरा को बरकरार रखते हुए दो दिवसीय बिहार उद्यमिता सम्मेलन की शुरुआत आज ज्ञान भवन में की गई।

ग्रासरूट से ग्लोबल तक की सोच के साथ किए जाने वाले इस आयोजन का उदघाटन बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा, भवन निर्माण विभाग के मंत्री महेश्वर हजारी और श्रम संसाधन विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया।

इस अवसर पर नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा की राज्य के उत्थान के लिए सरकार और उद्यमियों को साथ साथ काम करना होगा। राज्य में बड़े उद्योग-धंधों की औग्जीलियरी यूनिट्स की कमी है। बिहार करवट ले रहा है। राज्य के उत्थान के लिए सबको आगे आना होगा।

भवन निर्माण विभाग के मंत्री महेश्वर हजारी ने राज्य सरकार की नीतियों की विवेचना करते हुए कहा कि सरकार कि उद्योग नीति बाकी राज्यों कि तुलना में बेहतर है।

बिहारियों की बुद्धिमानी पर टिप्पणी करते हुए श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार का बेटा जहां जाता है, वहाँ राज्य का मान बढ़ाता है।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने खुले शब्दों में बिहार में काम कर रहे व्यापारियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कहा कि आप बेखौफ हो कर काम करें।

सम्मेलन के संबंध में बिहार उद्यमी संघ के महासचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि बीईए राज्य में हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान के लिए प्रयत्नशील रहा है। बीईए इस बार कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा की बेहतरी के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग पर काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि यह आयोजन भारतीय उद्यमी संघ के साथ मिलकर किया जा रहा है। यह सम्मेलन उद्यमियों का, उद्यमियों के लिए आयोजन है, जो सभी नए उपक्रमों, स्टार्टअप्स, युवा उद्यमियों के लिए विचार साझा करने का अवसर देता है।

इसका उद्देश्य निवेशकों, उद्योगपतियों और वैज्ञानिकों को उद्योग-व्यापार के प्रभावी विकास और बिहार में उद्योग-स्थापना के अवसरों के लिए विचार-मंथन के लिए एक मंच पर लाना है।

राज्य में स्टार्टअप्स, पारंपरिक व्यवसायों, नए और मौजूदा उपक्रमों को एक मंच प्रदान करने के लिए वार्षिक बिहार उद्यमिता सम्मेलन का आयोजन 2014 से किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य नीतियों के निर्माण, योजना, पहल और निष्पादन में शामिल लोगों को चर्चा के केंद्र में लाना है।